राजनीति छोड़ने की खबरों पर PK का बड़ा खुलासा-प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिया साफ-साफ जवाब…

Ritu Raj

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में मिली करारी हार के चार दिन बाद जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरी जिम्मेदारी अपने ऊपर ली। उन्होंने कहा कि महज़ 3.5% वोट मिलने के बावजूद मीडिया का इतना बड़ा जमावड़ा उनके लिए बड़ा संकेत है। प्रशांत किशोर ने स्वीकार किया कि ईमानदार प्रयास के बावजूद न सत्ता परिवर्तन हुआ और न ही जनता का भरोसा जीत सकेऔर इसके लिए वे खुद को ही पूरी तरह जिम्मेदार मानते हैं।

प्रशांत किशोर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि जन सुराज की हार सामूहिक है, लेकिन जिम्मेदारी पूरी तरह उनकी है। उन्होंने नीतीश कुमार और NDA सरकार पर अब जवाबदेही आने की बात कहते हुए रोज़गार और पलायन को सबसे बड़ा मुद्दा बताया। पीके ने कहा कि वे अपनी गलतियों के लिए माफी मांगते हैं और दो दिन बाद(20 नवंबर) भीतहरवा आश्रम में एक दिन का मौन उपवास करके प्रायश्चित करेंगे। पार्टी के अन्य सदस्य भी चाहें तो सामूहिक उपवास कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि बिहार में जाति और धार्मिक ध्रुवीकरण से दूर रहकर राजनीति करने की वजह से उनकी पार्टी को नुकसान हुआ, लेकिन यह उनका सिद्धांत है और वे पीछे हटने वाले नहीं। उन्होंने NDA पर 40 हजार करोड़ रुपये खर्च कर चुनाव प्रभावित करने का आरोप लगाया और कहा कि 10 हजार रुपये से वोट खरीदने का आरोप बेबुनियाद नहीं है, क्योंकि बड़ी संख्या में सरकारी तंत्र के जरिए यह राशि महिलाओं में बांटी गई। साथ ही चुनौती देते हुए कहा कि अगर सरकार हर महिला को छह महीने में 2-2 लाख रुपये दे दे, तो वे राजनीति छोड़ देंगे। उन्होंने अपना हेल्पलाइन नंबर जारी कर कहा कि जिन महिलाओं को वादा किए गए 2 लाख नहीं मिलते, वे उनसे संपर्क करें। साथ ही चेतावनी दी कि जिन नेताओं पर गंभीर आरोप हैं, यदि वे मंत्रिमंडल में शामिल किए जाते हैं, तो वे अदालत का दरवाज़ा खटखटाएंगे। आगे कहा कि वे पद से इस्तीफा देने की स्थिति में नहीं, लेकिन बिहार की बात करना कभी नहीं छोड़ेंगे और न ही बिहार छोड़ेंगे।

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दरअसल, मधुबनी विधानसभा क्षेत्र में उपेंद्र कुशवाहा के प्रत्याशी ने जीत दर्ज की, जबकि NDA के उम्मीदवार को 1 लाख से अधिक वोट मिले। भाजपा और JDU के प्रत्याशी न होने के बावजूद अन्य दलों के अज्ञात चिन्ह वाले उम्मीदवारों को इतने वोट कैसे मिले, यह बड़ी चुनौती बनकर सामने आया। बिहार की 243 सीटों में जन सुराज पार्टी ने 238 उम्मीदवार मैदान में उतारे, लेकिन 233 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई, यानी लगभग 98% उम्मीदवार चुनाव में टिक नहीं पाए। मढ़ौरा सीट पर पार्टी का उम्मीदवार दूसरे नंबर पर आया, लेकिन कुल मिलाकर जन सुराज को पूरे बिहार में मात्र करीब 2% मत मिले। इसके मुकाबले AIMIM ने 28 सीटों पर चुनाव लड़ा और 5 सीटें जीतकर बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि बसपा को 1 सीट मिली। उनके गृह जिले रोहतास की सातों सीटों पर उनकी पार्टी की जमानत जब्त हो गई। करगहर विधानसभा क्षेत्र में पार्टी को केवल 7.42% वोट मिले।

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