सिटी पोस्ट लाइव
बिहार चुनाव में ‘जन सुराज’ पार्टी को मिली करारी हार के बाद भी चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (पीके) ने हार नहीं मानी है। 238 सीटों पर पहली बार चुनाव लड़ने वाले पीके को भले ही एक भी सीट पर जीत न मिली हो और 236 सीटों पर जमानत जब्त हो गई हो, लेकिन उन्होंने परिणाम की जिम्मेदारी लेते हुए एक बड़ा और चौंकाने वाला ऐलान किया है। उन्होंने अपनी 90 प्रतिशत निजी संपत्ति बिहार की जनता के लिए दान करने की घोषणा की है।
90% संपत्ति ‘जन सुराज’ अभियान के लिए दान
चुनाव परिणामों से निराशा के बावजूद प्रशांत किशोर ने एक दिन का मौन व्रत रखा और फिर जनता के सामने अपना संकल्प दोहराया। पीके ने स्पष्ट किया कि वह अपनी कुल संपत्ति का 90% हिस्सा बिहार के लोगों के लिए दान कर देंगे। उन्होंने कहा कि दिल्ली में स्थित अपने पारिवारिक घर को छोड़कर, पिछले 20 वर्षों में उन्होंने जो भी चल और अचल संपत्ति अर्जित की है, वह सब उनके ‘जन सुराज’ अभियान और बिहार के विकास कार्यों में लगाई जाएगी।
इतना ही नहीं, पीके ने एक और बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि आने वाले अगले पाँच वर्षों में वह जितनी भी आय अर्जित करेंगे, उसका 90 प्रतिशत हिस्सा भी इसी अभियान के लिए दान कर दिया जाएगा। प्रशांत किशोर का यह कदम अब राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस का विषय बन गया है।
प्रशांत किशोर की कुल संपत्ति कितनी?
प्रशांत किशोर के इस बड़े ऐलान के बाद हर किसी के मन में यह सवाल है कि आखिर उनकी कुल संपत्ति कितनी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फिलहाल प्रशांत किशोर की कुल संपत्ति लगभग 55 से 60 करोड़ रुपये के बीच बताई जाती है। पीके ने पहले खुद भी खुलासा किया था कि उन्होंने चुनावी कंसल्टेंसी सर्विस से सिर्फ तीन वर्षों में 241 करोड़ रुपये कमाए थे। इसी कमाई का एक बड़ा हिस्सा उन्होंने अपनी पार्टी ‘जन सुराज’ बनाने और बिहार चुनाव में पूरी ताकत से उतरने में खर्च किया।
पीके की एक कंसल्टेंसी कंपनी भी थी, जिसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत देश की कई प्रमुख राजनीतिक पार्टियों के लिए चुनावी रणनीति तैयार की थी, जिससे उन्हें करोड़ों की आय हुई थी। बाद में वह उस कंपनी से अलग हो गए थे।
प्रशांत किशोर ने स्पष्ट किया है कि उन्होंने केवल दिल्ली वाले घर को ही दान से अलग रखा है, जहां उनका परिवार रहता है। चुनाव में करारी हार के बावजूद, पीके ने अपनी हार स्वीकार नहीं की है। उनका कहना है कि वह एक बार फिर जनता के बीच जाएंगे और बिहार में बदलाव की अपनी लड़ाई को लगातार जारी रखेंगे।