सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण के नामांकन का अंतिम दिन महागठबंधन के लिए भारी उठापटक वाला रहा। सीटों के बंटवारे पर आखिरी क्षण तक चली खींचतान के बीच राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस और अन्य घटक दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की सूची अलग-अलग जारी की। दलों का साझा मंच से सूची जारी करने का वादा हवा हो गया और उन्होंने देर रात तक अपने-अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की।
सीट बंटवारे की गुत्थी: आधिकारिक रूप से महागठबंधन का नेतृत्व कर रहा राजद 143 सीटों पर चुनाव मैदान में उतरेगा, जो कि गठबंधन में सर्वाधिक है। कांग्रेस को इस बार 61 सीटें मिली हैं। हालांकि, कांग्रेस आलाकमान अंतिम समय तक 2020 के चुनाव की भांति कम से कम 70 सीटों के लिए दबाव बनाता रहा, लेकिन अंततः उसे 61 सीटें ही मिल पाईं। वाम दल इस बार 30 सीटों पर मैदान में होंगे, जिनमें भाकपा माले 20, सीपीआई 9 और सीपीएम 6 सीटों पर लड़ रही है। विकासशील इंसान पार्टी (वीआइपी), जिसने लगातार 60 सीट और उप मुख्यमंत्री पद की मांग की थी, उसे कुल नौ सीटें ही मिल सकीं।
उम्मीदवारों की संख्या पर सवाल: गठबंधन में सीट शेयरिंग का मामला ऐसा फंसा रहा कि सहयोगी दलों ने सीट की घोषणा के पहले ही उम्मीदवारों को सिंबल देना शुरू कर दिया था। उल्लेखनीय है कि आधिकारिक रूप से भले ही महागठबंधन 243 सीटों पर चुनाव लड़ रहा हो, परंतु उसके कुल 254 उम्मीदवारों ने मैदान में मोर्चा संभालने की तैयारी कर रखी है। वाम दलों के खाते में 30 सीट हैं, जबकि उनके 35 उम्मीदवार मैदान में हैं। वहीं, वीआइपी को नौ सीटें मिलीं, किंतु उनके 15 उम्मीदवार मैदान में हैं। कई सीटों पर महागठबंधन के घटक दलों के बीच मतभेद बरकरार हैं, जिसके चलते कुछ सीटों पर मुकाबले की भी आशंका है।
डैमेज कंट्रोल के लिए गहलोत बिहार में: महागठबंधन की एकता पर उठ रहे सवालों के बीच कांग्रेस आलाकमान ने अब ‘डैमेज कंट्रोल’ की कवायद शुरू कर दी है। कांग्रेस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पार्टी के वरिष्ठ नेता और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को बिहार भेजा गया है। सूत्रों की मानें तो महागठबंधन के विवाद को कम करने के लिए अशोक गहलोत बुधवार सुबह बिहार पहुंचे हैं। वे तेजस्वी यादव से मुलाकात करेंगे और लालू प्रसाद से भी उनकी मुलाकात संभावित है। यह मुलाकात कांग्रेस और राजद के बीच बढ़ती दूरी को कम करने की दिशा में एक बड़ा राजनीतिक प्रयास माना जा रहा है।
एनडीए की तैयारी: दूसरी ओर, एनडीए ने अपनी उम्मीदवारों की सूची सप्ताह भर से अधिक समय पहले ही जारी कर दी थी। एनडीए में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) 101-101 सीटों पर, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) 29, हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा 6 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा 6 सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं।
चुनावी अभियान पर असर: विश्लेषकों का मानना है कि महागठबंधन के भीतर सीट बंटवारे और टिकट चयन को लेकर बनी असहमति चुनावी अभियान को प्रभावित कर सकती है और विपक्षी मतों का विभाजन करा सकती है, जिसका सीधा फायदा एनडीए को मिल सकता है। हालांकि, महागठबंधन के नेताओं का दावा है कि नामांकन के बाद सभी दल एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरेंगे और जनता के सामने महंगाई, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और वोट चोरी के मुद्दे पर सरकार को जवाब देंगे। 23 अक्टूबर को महागठबंधन के नेताओं की पटना में एक साझा प्रेस कांफ्रेंस की योजना है, जिसके बाद चुनावी अभियान में गति आने की उम्मीद है।
कुल उम्मीदवार: बिहार में महागठबंधन के कुल 254 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें आरजेडी के 143, कांग्रेस 61, भाकपा माले 20, सीपीआइ 9, सीपीएम 6 और वीआइपी के 15 उम्मीदवार शामिल हैं। यह अधिक संख्या सामंजस्य और तालमेल में कमी को दर्शाती है।