CBI ने राबड़ी देवी की याचिका पर कड़ा विरोध किया, कहा- अदालत को बदनाम नहीं किया जा सकता, न ही जज पर सवाल उठाए जा सकते हैं

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनके परिवार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जमीन के बदले नौकरी (Land for Job) और IRCTC घोटाले जैसे गंभीर मामलों की सुनवाई कर रहे जज विशाल गोगने को हटाने की राबड़ी देवी की याचिका पर शनिवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में बेहद सख्त दलीलें पेश कीं। सीबीआई ने दो टूक कहा कि कोई भी आरोपी अपनी पसंद की अदालत चुनने के लिए ‘फोरम शॉपिंग’ नहीं कर सकता और न ही न्यायपालिका को बदनाम करने की अनुमति दी जा सकती है।

क्या है पूरा विवाद?
राबड़ी देवी ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के समक्ष एक याचिका दायर कर मांग की थी कि उनके और उनके परिवार (लालू यादव और तेजस्वी यादव) के खिलाफ चल रहे घोटालों के चार मामलों को जज विशाल गोगने की अदालत से किसी दूसरी अदालत में स्थानांतरित (Transfer) कर दिया जाए। राबड़ी देवी का आरोप है कि जज का रवैया पक्षपातपूर्ण है और वह “पूर्वाग्रह से ग्रसित” होकर सुनवाई कर रहे हैं।

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CBI की दलील: ‘कोर्ट को बुलडोज नहीं किया जा सकता’
शनिवार को सुनवाई के दौरान सीबीआई के विशेष लोक अभियोजक (SPP) डी.पी. सिंह ने राबड़ी देवी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने अदालत में कहा: “आप अपनी सुविधा के अनुसार जज नहीं चुन सकते। जज गोगने केवल कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन कर रहे हैं। आप न तो कोर्ट को ‘बुलडोज’ कर सकते हैं और न ही जज को बदनाम करके उन पर दबाव बना सकते हैं।”

भाषा और चुनावी टाइमिंग पर भी छिड़ी बहस
राबड़ी देवी ने अपनी याचिका में जज पर यह भी आरोप लगाया था कि उन्होंने आरोप तय करते समय आदेश को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में पढ़कर सुनाया, ताकि मीडिया और लोगों का ध्यान आकर्षित हो। इस पर सीबीआई ने जवाब दिया कि यह एक संवैधानिक कर्तव्य है कि आरोपी को उसकी भाषा में आरोप समझाए जाएं।

वहीं, बिहार चुनाव की आचार संहिता के दौरान आदेश सुनाने के आरोप पर सीबीआई ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया का राजनीति से कोई लेना-देना नहीं है। जज ने केवल मामले के कुछ तकनीकी बिंदुओं पर स्पष्टता के लिए समय लिया था, जिसे “साजिश” कहना पूरी तरह गलत है।

15 दिसंबर को अगली भिड़ंत
फिलहाल कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनी हैं और मामले की अगली सुनवाई 15 दिसंबर के लिए तय की है। राबड़ी देवी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह पैरवी कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि अदालत इस ‘जज ट्रांसफर’ याचिका पर क्या फैसला सुनाती है, क्योंकि इसका सीधा असर लालू परिवार से जुड़े हाई-प्रोफाइल घोटालों की रफ्तार पर पड़ेगा।

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