बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को हाल ही में हिजाब विवाद को लेकर पाकिस्तान से धमकी मिली है। पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा है कि अगर नीतीश कुमार सार्वजनिक तौर पर माफी नहीं मांगते हैं तो इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। यह चेतावनी उस समय आई है जब मुख्यमंत्री ने हाल ही में 1283 आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र वितरित करते हुए एक मुस्लिम महिला डॉक्टर का हिजाब खींच दिया था, जिससे राजनीति और समाज में बहस तेज हो गई है।
बीते दिनों बिहार में एक विवादित घटना सामने आई, जब नवनियुक्त महिला आयुष डॉक्टर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नियुक्ति पत्र सौंपते समय उसके हिजाब को अपने हाथ से हटाया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और राजनीति में गर्मागरमी पैदा कर दी। यह घटना मुख्यमंत्री सचिवालय के कार्यक्रम ‘संवाद’ के दौरान हुई, जिसमें एक हजार से अधिक आयुष चिकित्सकों को नियुक्ति पत्र दिए जा रहे थे। वहीं, नीतीश कुमार की इस हरकत की कई लोगों ने आलोचना की, और लखनऊ में शिकायत भी दर्ज कराई गई। कई मुस्लिम नेताओं ने इसे अनुचित और आपत्तिजनक बताया। इस बीच, पाकिस्तानी डॉन शहजाद भट्टी ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि बिहार में जो हुआ, वह सभी ने देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि एक उच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति ने एक मुस्लिम महिला के साथ अनुचित व्यवहार किया। हालांकि, भट्टी ने चेतावनी दी कि मुख्यमंत्री के पास अभी भी महिला से माफी मांगने का मौका है। यदि तुरंत माफी नहीं मिली, तो “जिम्मेदार संस्थानों” को कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बाद में कोई यह न कहे कि उन्हें चेतावनी नहीं दी गई थी। गौरतलब है कि हाल ही में शहजाद भट्टी ने कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को भी धमकी दी थी, जिससे उनकी छवि और अधिक विवादास्पद बन गई है।
दरअसल, इस घटना ने राजनीति और समाज में बहस का नया दौर शुरू कर दिया है। वीडियो वायरल होने के बाद विपक्षी दलों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की हरकत की कड़ी निंदा की है। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने इसे महिलाओं के अधिकारों और संवैधानिक मर्यादा के उल्लंघन के रूप में बताया और सवाल उठाया कि क्या इतनी उच्च पदस्थ संवैधानिक शख्सियत को अपने व्यवहार में संयम नहीं रखना चाहिए। वहीं, सोशल मीडिया पर भी जनता ने इस घटना को लेकर गहरी चिंता और आलोचना व्यक्त की। कई लोग इसे महिलाओं के सम्मान पर हमला मान रहे हैं, तो कुछ ने सवाल किया कि क्या सरकारी कार्यक्रमों में इस तरह का आचरण स्वीकार्य है। इस बीच, मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। घटना ने न केवल बिहार में बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी हिजाब विवाद और महिलाओं के अधिकारों पर गंभीर बहस को जन्म दे दिया है।