वोट चोरी, चुनावी धांधली और निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर विपक्ष के तीखे सवालों के बीच केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख जीतनराम मांझी ने रीकाउंटिंग से जुड़े एक वायरल वीडियो को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। मांझी ने वीडियो को भ्रामक करार देते हुए कहा कि उनकी बातों को तोड़-मरोड़कर और संदर्भ से अलग दिखाया गया है, जिससे गलत संदेश फैलाया जा रहा है।
जीतनराम मांझी ने कहा कि उनका बयान किसी भी सूरत में चुनावी प्रक्रिया या चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने वाला नहीं था। उन्होंने स्पष्ट किया कि मतगणना के दौरान प्रत्याशियों द्वारा रीकाउंटिंग की मांग करना एक सामान्य प्रक्रिया है और कई मामलों में इससे परिणाम बदल भी जाते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने अपनी बात रखी थी, लेकिन उसे तोड़-मरोड़कर गलत अर्थ में वायरल कर दिया गया। टिकारी विधानसभा सीट का हवाला देते हुए मांझी ने कहा कि वहां हार के लिए प्रत्याशी अनिल कुमार स्वयं जिम्मेदार थे। उनके अनुसार, मतगणना में पिछड़ते ही अनिल कुमार ने केंद्र छोड़ दिया, जबकि उन्हें रिटर्निंग ऑफिसर के समक्ष रीकाउंटिंग की मांग करनी चाहिए थी।
गौरतलब है कि मांझी ने दो टूक देते हुए कहा कि “मेरा कैंडिडेट मैदान छोड़कर नहीं भागना चाहिए था, गलती उन्हीं की है।” उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि वर्ष 1990 में वे खुद 127 वोटों से चुनाव हारे थे, लेकिन तब भी उन्होंने कभी चुनावी मशीनरी या अधिकारियों पर सवाल नहीं उठाए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उसी अनुभव को आज संदर्भ से हटाकर पेश किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव प्रक्रिया, मशीनरी या पदाधिकारियों में कोई खामी नहीं है और कई बार हार की असली वजह उम्मीदवार व कार्यकर्ताओं की रणनीतिक चूक होती है। उनके मुताबिक, इस मामले में भी कार्यकर्ताओं की कमजोरी और उम्मीदवार का मतगणना के दौरान मैदान छोड़ देना ही हार का मुख्य कारण बना।