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दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग, जो तमिलनाडु के महाबलीपुरम से 2178 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर गोपालगंज पहुंचा है, अब एक नई चुनौती का सामना कर रहा है। यह विशाल शिवलिंग, जिसका वजन लगभग 210 मीट्रिक टन है, को बिहार के पूर्वी चंपारण स्थित विराट रामायण मंदिर तक पहुंचाने के लिए प्रशासन को कठिन समस्या का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल, यह शिवलिंग गोपालगंज में स्थित है, और उसे नारायणी नदी (गंडक) पार कर पूर्वी चंपारण तक पहुंचाना है। लेकिन सबसे बड़ी बाधा बनी है गंडक नदी पर स्थित डुमरियाघाट सेतु, जिसकी स्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह पुल इतना भारी वजन सहन कर पाएगा या नहीं।
डुमरियाघाट सेतु पर संदेह
डुमरियाघाट सेतु की जर्जर स्थिति को लेकर प्रशासन में चिंता है, क्योंकि शिवलिंग के अत्यधिक वजन को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि क्या पुल इसे सुरक्षित तरीके से पार करवा पाएगा। इस चुनौती से निपटने के लिए प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है और विशेषज्ञ इंजीनियरों की एक टीम को बुलाया है, ताकि पुल की स्थिति का तकनीकी रूप से आकलन किया जा सके।
प्रशासनिक टीम ने लिया जायजा
गोपालगंज के डीएम पवन कुमार सिन्हा और पुलिस अधीक्षक अवधेश दीक्षित रविवार की शाम मौके पर पहुंचे और शिवलिंग के स्थान का जायजा लिया। साथ ही, डुमरियाघाट सेतु की स्थिति की जांच के लिए पुल निगम और विशेषज्ञ इंजीनियरों की टीम को बुलाया गया है। अगर इंजीनियरों की टीम सेतु से शिवलिंग पार कराने की अनुमति नहीं देती है, तो यह काम और भी कठिन हो सकता है।
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
एसपी अवधेश दीक्षित ने बताया कि शिवलिंग को देखने के लिए भारी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है, इसलिए सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा किया गया है। साथ ही, ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए भी विशेष योजनाएं बनाई जा रही हैं, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था से बचा जा सके।
शिवलिंग का विशाल आकार और महत्व
बता दें कि तमिलनाडु के महाबलीपुरम में तैयार किया गया यह 33 फुट ऊंचा और 33 फुट लंबा शिवलिंग दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग माना जाता है। इसे पूर्वी चंपारण के कल्याणपुर में बन रहे विराट रामायण मंदिर में स्थापित किया जाएगा। इस शिवलिंग की 30 दिनों में 2178 किलोमीटर लंबी यात्रा पूरी की गई और यह अब गोपालगंज पहुंच चुका है। बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी समेत अन्य प्रतिष्ठित लोग इस विशाल शिवलिंग का स्वागत करने में जुटे हुए हैं।
डुमरियाघाट सेतु के ऊपर से शिवलिंग को पार करने के लिए आवश्यक तकनीकी आकलन किया जा रहा है। अगर पुल की स्थिति शिवलिंग को सुरक्षित पार करने की अनुमति देती है, तो यह ऐतिहासिक कृति पूर्वी चंपारण के विराट रामायण मंदिर में स्थापित होगी। इस यात्रा और स्थापना के दौरान प्रशासन ने पूरी कोशिश की है कि यह कार्य सभी सुरक्षा उपायों के साथ समय पर और सही तरीके से पूरा हो सके।