बिहार में सराफा कारोबार से जुड़े व्यापारियों ने बढ़ती आपराधिक घटनाओं को देखते हुए सुरक्षा को लेकर एक नया नियम लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत अब राज्य की सोना-चांदी की दुकानों में हिजाब, नक़ाब या घूंघट पहनकर आने वाली महिलाओं, वहीं हेलमेट या मुरेठा पहने हुए पुरुषों को प्रवेश नहीं दिया जाएगा। इस फैसले के बाद कई सराफा प्रतिष्ठानों के बाहर स्पष्ट सूचना बोर्ड भी लगाए गए हैं, जिन पर लिखा है कि चेहरा ढककर दुकान में आना प्रतिबंधित है।
सराफा व्यापारियों का कहना है कि यह कदम किसी भी समुदाय, धर्म या वर्ग को लक्षित करने के उद्देश्य से नहीं उठाया गया है, बल्कि इसका मकसद केवल सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हाल के महीनों में बिहार के विभिन्न जिलों में सराफा दुकानों में लूट और चोरी की घटनाओं में इजाफा हुआ है। कई मामलों में अपराधी चेहरे को ढककर दुकान में दाखिल हुए और वारदात के बाद आसानी से फरार हो गए। वहीं, व्यापारियों का मानना है कि ऐसी घटनाओं से न सिर्फ दुकानदारों की सुरक्षा खतरे में पड़ती है, बल्कि ग्राहकों की जान-माल पर भी जोखिम बढ़ जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है। सराफा एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई ग्राहक खरीदारी करना चाहता है तो वह दुकान में प्रवेश से पहले अपना चेहरा स्पष्ट रूप से दिखाकर या पहचान सुनिश्चित कर सकता है।
कारोबारियों का दावा है कि इस नियम से अपराधियों पर लगाम लगेगी और बाजारों में सुरक्षा का माहौल बेहतर होगा, जिससे ग्राहक भी अधिक निश्चिंत होकर खरीदारी कर सकेंगे। इस मामले में ऑल इंडिया गोल्ड एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा ने बताया कि, ‘सराफा कारोबार हमेशा से अपराधियों के निशाने पर रहा है। हमने यह निर्णय पूरी तरह से सुरक्षा को ध्यान में रखकर लिया है। आए दिन दुकानों में लूटपाट की घटनाएं हो रही हैं। चेहरे ढके होने के कारण अपराधियों की पहचान कर पाना मुश्किल हो जाता है। इसी को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।’