तेजस्वी को छोड़ विजय सिन्हा के घर पहुँचे तेज प्रताप, क्या बिहार में पक रही है कोई नई खिचड़ी?

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की सियासत में मकर संक्रांति का त्योहार केवल तिलकुट और दही-चूड़ा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह नए राजनीतिक समीकरणों का भी गवाह बनता है। इस साल लालू यादव के बड़े बेटे और जनशक्ति जनता दल (JJD) के प्रमुख तेज प्रताप यादव ने एक बड़ा दांव खेला है। अपनी नई पार्टी बनाने के बाद तेज प्रताप अब अपनी स्वतंत्र राजनीतिक जमीन तैयार करने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में वे बुधवार को खुद चलकर उप-मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के आवास पहुँचे और उन्हें दही-चूड़ा भोज का न्योता दिया।

तेज प्रताप यादव का डिप्टी सीएम विजय सिन्हा के आवास पर पहुँचना बिहार की राजनीति में एक बड़ी तस्वीर पेश कर रहा है। उन्होंने विजय सिन्हा को पारंपरिक तरीके से तिलक लगाकर 14 जनवरी के भोज के लिए आमंत्रित किया। कभी सदन में एक-दूसरे पर कड़े प्रहार करने वाले इन दोनों नेताओं के बीच आज की मुलाकात बेहद सौहार्दपूर्ण रही। तेज प्रताप ने स्पष्ट किया कि राजनीति अपनी जगह है, लेकिन बिहार की ‘संस्कृति और संस्कार’ सर्वोपरि हैं।

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नीतीश और तेजस्वी को भी आमंत्रण: ‘शक्ति प्रदर्शन’ की तैयारी?
तेज प्रताप यादव ने घोषणा की है कि वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित एनडीए और विपक्ष के तमाम दिग्गज नेताओं को आमंत्रित कर रहे हैं। हालांकि, सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या तेजस्वी यादव अपने बड़े भाई के इस बुलावे पर पहुँचेंगे? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक भोज नहीं, बल्कि तेज प्रताप का ‘शक्ति प्रदर्शन’ भी है। वे यह दिखाना चाहते हैं कि परिवार और राजद से अलग होने के बाद भी उनकी स्वीकार्यता सभी दलों के बीच बनी हुई है।

लालू की विरासत और नया सियासी मिजाज
दशकों तक लालू यादव के आवास पर दही-चूड़ा भोज की परंपरा बिहार की पहचान रही है, जहाँ विरोधी भी गिले-शिकवे भूलकर एक साथ नजर आते थे। अब तेज प्रताप उसी विरासत को अपनी नई पार्टी JJD के झंडे तले आगे बढ़ा रहे हैं। एनडीए के नेताओं, खासकर भाजपा और उपेंद्र कुशवाहा के करीबियों से उनकी बढ़ती नजदीकी यह संकेत दे रही है कि आने वाले समय में वे किसी नए सियासी गठबंधन का हिस्सा बन सकते हैं। 14 जनवरी को पटना में होने वाला यह भोज तय करेगा कि बिहार की राजनीति में ‘दही’ कितना जमता है और ‘चूड़ा’ किसके साथ मिलता है।

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