सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की पहली फिनटेक सिटी अब जमीन पर आकार लेने लगी है। करीब 408.81 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित इस फिनटेक सिटी का निर्माण पटना जिले के जैतिया और आसपास के क्षेत्रों में किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य बिहार को वित्तीय क्षेत्र में एक प्रमुख केंद्र बनाना है। पटना के जिलाधिकारी, त्यागराजन एसएम ने हाल ही में फिनटेक सिटी के निर्माण स्थल का निरीक्षण किया। इस दौरान प्रशासनिक टीम भी मौके पर मौजूद रही, जिसमें कार्यपालक दंडाधिकारी सुनील कुमार और फतुहा अंचलाधिकारी मुकेश कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
फिनटेक सिटी 242 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी, जहां देश-विदेश की बड़ी फाइनेंस कंपनियां और कॉर्पोरेट दफ्तर स्थापित होंगे। इस परियोजना का एक हिस्सा 105 एकड़ क्षेत्र में लॉजिस्टिक पार्क का निर्माण भी है, जो व्यापारिक गतिविधियों और ट्रांसपोर्टेशन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। प्रशासन का मानना है कि इस परियोजना से न केवल बिहार में वित्तीय समावेश को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
हालांकि, इस परियोजना के चलते कुछ किसानों ने जिलाधिकारी से मुलाकात की और अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। किसानों का कहना था कि उनके खेतों पर बिना सूचना के भूमि अधिग्रहण के झंडे लगाए गए हैं, जिससे क्षेत्र में नाराजगी फैल गई है। किसानों ने यह भी मांग की कि उनकी भूमि को कृषि भूमि की बजाय आवासीय श्रेणी में माना जाए, क्योंकि अब यह इलाका रिहायशी बन चुका है।
डीएम त्यागराजन एसएम ने किसानों की शिकायतों को गंभीरता से सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और नियमों के तहत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि सभी किसानों को उचित और अधिकतम मुआवजा दिया जाएगा, ताकि किसी के साथ अन्याय न हो।
इस परियोजना को बिहार के आर्थिक भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, लेकिन भूमि अधिग्रहण और मुआवजे से संबंधित विवादों को लेकर यह परियोजना एक बड़ी चुनौती का सामना कर रही है।