सिटी पोस्ट लाइव
राजधानी पटना में नीट (NEET) की तैयारी कर रही छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म और उपचार के दौरान हुई मौत ने अब एक बड़े सियासी तूफान का रूप ले लिया है। इस मामले में रोहिणी आचार्य की एंट्री ने बिहार की नीतीश सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया है। रोहिणी ने सोशल मीडिया के माध्यम से सीधा हमला बोलते हुए पूछा है— “पूछता है बिहार, आखिर कब होगी हॉस्टल मालिक और उसके बेटे की गिरफ्तारी?”
सत्ता और सिस्टम पर उठते गंभीर सवाल
रोहिणी आचार्य ने आरोप लगाया है कि इतने जघन्य अपराध के बावजूद मुख्य आरोपियों पर कार्रवाई में देरी यह संकेत देती है कि शासन-प्रशासन किसी ‘प्रभावशाली’ चेहरे को बचाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने न्याय की मांग करते हुए कहा कि जब तक अग्रवाल दंपती और उनका बेटा सलाखों के पीछे नहीं जाते, बिहार की बेटियों की सुरक्षा पर सवाल बने रहेंगे।
SIT की कार्रवाई: तीन संदिग्ध हिरासत में
मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित की गई विशेष जांच टीम (SIT) ने रविवार देर रात बड़ी कार्रवाई करते हुए मृतका के तीन करीबी संदिग्धों को हिरासत में लिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, तकनीकी साक्ष्यों और कॉल डिटेल्स के आधार पर इन लोगों को उठाया गया है। हालांकि, पुलिस ने अब तक आधिकारिक तौर पर इनकी भूमिका का खुलासा नहीं किया है, लेकिन माना जा रहा है कि आज सोमवार को पुलिस इस मामले में किसी बड़े घटनाक्रम की जानकारी दे सकती है।
विपक्ष का हल्लाबोल और मानवाधिकार आयोग की दखल
सिर्फ राजद ही नहीं, बल्कि कांग्रेस और पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने भी सरकार की घेराबंदी तेज कर दी है। कांग्रेस आज पटना के इनकम टैक्स चौराहे पर विशाल प्रदर्शन करने जा रही है। वहीं, पप्पू यादव ने निजी अस्पताल के डॉक्टरों और पुलिस पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा है कि छात्रा को सच छुपाने के लिए जबरन वेंटिलेटर पर रखा गया था।
दूसरी ओर, मानवाधिकार अधिवक्ता एस.के. झा ने इस मामले को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुँचा दिया है। उन्होंने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को पत्र लिखकर सेवानिवृत्त जज की निगरानी में निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि रसूखदारों के दबाव को खत्म किया जा सके।
जांच के घेरे में अस्पताल और हॉस्टल
पुलिस अब हॉस्टल के साथ-साथ प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल की गतिविधियों की भी सूक्ष्मता से जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म और शरीर पर गंभीर चोटों की पुष्टि होने के बाद यह मामला पूरी तरह से हत्या और साजिश के कोण पर केंद्रित हो गया है। अब देखना यह है कि क्या पुलिस केवल ‘करीबियों’ पर कार्रवाई कर खानापूर्ति करती है या रोहिणी आचार्य द्वारा उठाए गए ‘बड़े नामों’ तक कानून के हाथ पहुँचते हैं।