पटना में एक NEET की तैयारी कर रही युवा छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब तेजी से गरमाता जा रहा है। यह घटना बिहार की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। 18 जनवरी 2026 को SIT (विशेष जांच टीम) ने जांच को और तेज कर दिया। टीम ने इलाज से जुड़े निजी अस्पतालों का दौरा किया, वहां के डॉक्टरों व कर्मचारियों से लंबी पूछताछ की और मृतक छात्रा की मेडिकल रिपोर्ट्स को बारीकी से खंगाला। सूत्रों के अनुसार, SIT ने इस दौरान तीन लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे घटना के सभी पहलुओं पर गहन पूछताछ जारी है। जांच इलाज, घटनाक्रम और संभावित अपराध के हर कोण से चल रही है।
पुलिस की शुरुआती लापरवाही पर सवाल;
मामले में पटना पुलिस की भूमिका भी विवादों में है। संदिग्ध परिस्थितियों में मिली छात्रा का केस मेडिको-लीगल केस (MLC) के तहत दर्ज होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। चित्रगुप्त नगर थाने की SHO रौशनी कुमारी को 6 जनवरी को ही FIR दर्ज करनी चाहिए थी, हॉस्टल के कमरे को सील करना चाहिए था और फॉरेंसिक टीम बुलानी चाहिए थी। लेकिन इनमें से कोई भी जरूरी कदम नहीं उठाया गया। वहीं, कमरा खुला छोड़ देने से सबूतों के साथ छेड़छाड़ का पूरा मौका मिल गया। अपनी गलतियों को छिपाने के लिए पुलिस ने शुरू में इसे आत्महत्या का मामला बताने की कोशिश की, जिसे बड़े अधिकारी भी आगे बढ़ाते रहे। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में यौन हिंसा की संभावना से इनकार नहीं किया गया, जिसने शुरुआती दावों को पूरी तरह गलत साबित कर दिया।

जन आक्रोश और विरोध प्रदर्शन;
इस पूरे प्रकरण ने समाज में भारी आक्रोश पैदा किया है। नागरिक संवाद समिति के बैनर तले पटना में कैंडल मार्च निकाला गया, जिसमें बड़ी संख्या में डॉक्टर, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी और आम नागरिक शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारेबाजी की और आरोप लगाया कि छात्रा के साथ पहले दरिंदगी की गई और फिर उसकी निर्मम हत्या कर दी गई। अब तक किसी भी मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हुई है, जिससे लोगों का गुस्सा और बढ़ गया है। उन्होंने यह भी कहा कि बिहार में महिलाओं और छात्राओं के खिलाफ अपराध लगातार बढ़ रहे हैं। कई मामलों में दुष्कर्म के बाद पीड़ितों की हत्या कर दी जा रही है, जो राज्य की कानून-व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े करता है। नीतीश सरकार ने विपक्ष के दबाव और जन आक्रोश के बाद ही SIT गठित की है। अब सबकी नजरें इस जांच पर टिकी हैं कि क्या जल्द ही दोषियों को सजा मिल पाएगी और न्याय सुनिश्चित होगा।