आखिर कन्हैया कुमार से क्यों नाराज हैं गांव के लोग. गंगाजल से मंदिर को क्यों धोया?

City Post Live

Kanhaiya Kumar:

सिटी पोस्ट लाइव : कन्हैया कुमार की “ नौकरी दो, पलायन रोको” यात्रा के रास्ते में खलल डालने की कोशिश शुरू हो गई है. पलायन रोको नौकरी दो यात्रा लेकर  सहरसा के बनगांव में पहुंचे कन्हैया कुमार ने भगवती स्थान परिसर में सभा को संबोधित किया जिसके बाद ग्रामीणों ने सभा स्थल को गंगाजल से धोया. इस दौरान लोगों ने कन्हैया कुमार पर भारतीय संस्कृति का अपमान करने का भी आरोप लगाया.ग्रामीण अमित चौधरी के नेतृत्व में कुछ स्थानीय ग्रामीण युवाओं ने सभा मंच को गंगाजल से धोया.अमित चौधरी ने कहा कि जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष एवं कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने देश विरोधी नारे लगाकर भारत के संप्रभुता और संस्कृति का अपमान किया.

उन्होंने कहा कि  उनके द्वारा मंगलवार की रात बनगांव में भगवती स्थान परिसर में सभा को संबोधित किया गया. जबकि भगवती स्थान बनगांव धार्मिक आस्था का प्रतीक है, हम सभी इसे पवित्र बनाए रखना चाहते हैं. इस घटना के बाद क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक चर्चा तेज हो गई हैं.बुधवार को ‘पलायन रोको नौकरी दो’ यात्रा के क्रम में सहरसा में कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने कोसी पीड़ित विकास प्राधिकार व मखाना किसानों की समस्याओं को उठाया.कहा कि शंकराचार्य को शास्त्रार्थ में पराजित करने वाले मंडन मिश्र की गौरवशाली धरती का वर्तमान इतना विकट क्यों है. इस पर विचार करने की आवश्यकता है.

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कन्हैया कुमार ने कहा कि एकतरफ लोग बाढ़ से परेशान हैं, दूसरी तरफ बाढ़ के कारण आधारभूत संरचनाओं का विकास नहीं हो रहा है. खासकर शिक्षा की सुविधा का बेहद अभाव है. प्राधिकार के प्रावधान के अनुसार पीड़ित लोगों को कोई सुविधा नहीं मिल रही है.उन्होंने कहा कि दुनिया का 90 प्रतिशत मखाना उत्पादन करने वाले इस क्षेत्र के मखाना किसानों को कोई लाभ नहीं मिल रहा है. फलस्वरूप यह सुपर फूड तो बना, परंतु इसका लाभ किसान के बदले बिचौलिया ले रहे हैं.मधुबनी पेंटिग्स का भी यहीं हाल है. उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि यात्रा के क्रम में बिहार के इन मुद्दों को उठा सकें.

कन्हैया कुमार ने कहा कि सहरसा शहर के बीच में ही रेलवे फाटक है, जिसके कारण दिनभर जाम की समस्या रहती है.पता चला कि आरओबी के लिए कई बार शिलान्यास भी हुआ, लेकिन दरभंगा एम्स की तरह बनने से पहले वाहवाही की होड़ लगी हुई है.राजनीति में जो नाकारात्मक विमर्श की प्रवृति बढ़ रही है, उसे साकारात्मक बनाने की जरूरत है. हमारा प्रयास है कि हर दल, गठबंधन के लोग पलायन की समस्या रोकने के लिए एजेंडा बनाए.

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