सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में भ्रष्ट लोकसेवकों पर नकेल कसने के लिए सरकार और निगरानी विभाग लगातार कार्रवाई कर रहे हैं, इसके बावजूद कुछ अधिकारी और कर्मचारी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि इन्होंने ‘हम नहीं सुधरेंगे’ की कसम खा ली है। ताजा मामला बिहार के किशनगंज जिले का है, जहां विजिलेंस (निगरानी अन्वेषण ब्यूरो) की टीम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ एक और बड़ी और अहम कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस छापेमारी में किशनगंज के जिला खनन कार्यालय में तैनात एक लिपिक (क्लर्क) और एक परिचारी (चपरासी) को ट्रैक्टर रिलीज करने के नाम पर रिश्वत लेते हुए रंगेहाथों गिरफ्तार किया गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला खनन कार्यालय के लिपिक अशोक कुमार चौधरी को 8,000 रुपये और परिचारी सरोज कुमार सिंह को 7,000 रुपये की घूस लेते हुए पकड़ा गया है। निगरानी टीम ने बड़ी ही चालाकी से जाल बिछाकर दोनों को अलग-अलग जगहों से दबोचा। लिपिक अशोक कुमार चौधरी को उनके कार्यालय यानी जिला खनन कार्यालय के पास से ही रिश्वत की रकम के साथ गिरफ्तार किया गया। वहीं, दूसरी ओर परिचारी सरोज कुमार सिंह को किशनगंज के डुमरिया मोड़ स्थित एक चाय की दुकान से उस वक्त गिरफ्तार किया गया, जब वह घूस के पैसे ले रहा था।
क्या है पूरा मामला?
इस पूरे मामले की शुरुआत एक आम नागरिक की शिकायत से हुई थी। दरअसल, किशनगंज जिले के चकला गांव के रहने वाले रब्बुल हुसैन के बेटे हबीब आलम ने पटना स्थित निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के मुख्यालय में एक लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता हबीब आलम ने अपनी शिकायत में बताया था कि खनन विभाग द्वारा उनके एक ट्रैक्टर को जब्त कर लिया गया था। इस जब्त किए गए ट्रैक्टर का रिलीज ऑर्डर (मुक्ति आदेश) निकालने के एवज में खनन कार्यालय के बड़े बाबू (आरोपी लिपिक) और परिचारी द्वारा लगातार रिश्वत की मांग की जा रही है। बिना घूस दिए उनका कानूनी काम नहीं किया जा रहा था।
निगरानी विभाग की सुनियोजित कार्रवाई
हबीब आलम की शिकायत प्राप्त होने के बाद निगरानी ब्यूरो ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सबसे पहले शिकायत का गुप्त रूप से सत्यापन (Verification) कराया। सत्यापन की प्रक्रिया के दौरान यह स्पष्ट हो गया कि आरोपी लिपिक और उनके कार्यालय के चपरासी द्वारा शिकायतकर्ता से वाकई में रिश्वत की मांग की जा रही है। प्रथम दृष्टया आरोप सत्य पाए जाने के बाद ब्यूरो ने तुरंत संबंधित धाराओं में एक कांड दर्ज किया।
इसके बाद, भ्रष्टाचारियों को रंगेहाथ पकड़ने के लिए पुलिस उपाधीक्षक (DSP) श्री आसिफ इकबाल मेहदी, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना के नेतृत्व में एक विशेष धावादल (छापेमारी टीम) का गठन किया गया। इस टीम ने पूरी योजना के साथ किशनगंज में दबिश दी और दोनों आरोपियों को तय की गई रिश्वत की कुल 15,000 रुपये की रकम लेते हुए धर दबोचा।
आगे की कानूनी प्रक्रिया
निगरानी विभाग की टीम अब दोनों गिरफ्तार आरोपियों, अशोक कुमार चौधरी और सरोज कुमार सिंह से कड़ी पूछताछ कर रही है। कागजी कार्रवाई पूरी होने के उपरांत इन दोनों को माननीय विशेष न्यायालय, निगरानी, भागलपुर के समक्ष पेश किया जाएगा। विभाग इस मामले में आगे का अनुसंधान भी कर रहा है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस भ्रष्टाचार के 01सिंडिकेट में कार्यालय के कुछ और अधिकारी तो शामिल नहीं हैं। निगरानी की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से किशनगंज के अन्य सरकारी महकमों में भी हड़कंप मच गया है।