बिहार में जारी 10वीं की बोर्ड परीक्षा इस समय विवादों के घेरे में है। राज्यभर के 8 हजार से अधिक केंद्रों पर आयोजित हो रही इस परीक्षा में ‘देरी से पहुंचने’ पर प्रवेश न मिलने का नियम छात्रों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। कई जिलों से ऐसी खबरें आईं जहाँ परीक्षा छूटने के सदमे में परीक्षार्थियों ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम उठा लिया।
विधानसभा से परिषद तक भारी हंगामा;
इस मुद्दे की गूंज बिहार विधानसभा और विधान परिषद के मौजूदा सत्र में भी सुनाई दी। विपक्ष ने इन दुखद घटनाओं को लेकर नीतीश सरकार पर तीखा प्रहार किया। सदन के भीतर और बाहर विपक्षी सदस्यों ने सरकार की “कठोर नीतियों” को इन मौतों का जिम्मेदार ठहराया।
भाई वीरेंद्र का सरकार पर सीधा हमला;
आरजेडी (RJD) के वरिष्ठ नेता और विधायक भाई वीरेंद्र ने इस मुद्दे पर मोर्चा खोलते हुए सरकार की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि विधायक ने सरकार को ‘अत्याचारियों की सरकार’ करार देते हुए कहा कि परीक्षा के ऐसे नियम छात्रों की जान ले रहे हैं।वहीं, तर्क दिया कि यदि सरकार समय को लेकर इतनी सख्त है, तो परीक्षार्थियों को होम सेंटर (अपने ही स्कूल में केंद्र) की सुविधा दी जानी चाहिए ताकि यात्रा की दूरी बाधक न बने। उन्होंने मांग की कि यदि होम सेंटर संभव नहीं है, तो परीक्षार्थियों को कम से कम 15 मिनट का ग्रेस टाइम (अतिरिक्त समय) दिया जाए। इससे ट्रैफिक या अन्य कारणों से देरी होने पर छात्रों का साल बर्बाद होने से बच सकेगा। “नियम छात्रों की सुविधा के लिए होने चाहिए, उन्हें मौत के मुंह में धकेलने के लिए नहीं। अगर सरकार व्यवस्था नहीं सुधार सकती, तो उसे इन मासूमों की मौतों की जिम्मेदारी लेनी होगी।” – भाई वीरेंद्र, विधायक (RJD)