बिहार की पांच राज्यसभा सीटों के लिए होने वाले आगामी चुनाव ने प्रदेश के सियासी पारे को बढ़ा दिया है। इस बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के एक हालिया बयान ने महागठबंधन के खेमे में हलचल तेज कर दी है।
दरअसल,उपेंद्र कुशवाहा ने एनडीए की मजबूती का दावा करते हुए विपक्ष की रणनीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कुशवाहा के अनुसार, राज्यसभा की पांचों सीटों पर एनडीए की जीत तय है। उन्होंने दावा किया कि हार के डर से महागठबंधन शायद अपना उम्मीदवार ही खड़ा न करे। उनके शब्दों में, “विपक्ष अपनी इज्जत बचाने के लिए मैदान छोड़ सकता है।” उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष के कई विधायक एनडीए के संपर्क में हैं, जिससे महागठबंधन के अंदरूनी समीकरण बिगड़ सकते हैं।
खुद की उम्मीदवारी पर रुख;
जब कुशवाहा से उनके राज्यसभा जाने की चर्चाओं पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि गठबंधन के तहत उन्हें एक एमएलसी और एक राज्यसभा सीट का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अंतिम फैसला एनडीए का शीर्ष नेतृत्व ही लेगा।
पार्टी की अंदरूनी कलह और भविष्य की रणनीति;
पार्टी के स्थापना दिवस पर कुछ प्रमुख नेताओं (माधव आनंद और रामेश्वर महतो) की अनुपस्थिति ने अंतर्कलह के संकेत दिए, जिस पर कुशवाहा ने सीधा जवाब देने से परहेज किया। फिलहाल उनका पूरा ध्यान संगठन के विस्तार पर है:
| अभियान | लक्ष्य |
| सदस्यता अभियान | पूरे बिहार में नए कार्यकर्ताओं को जोड़ना। |
| बूथ स्तर की मजबूती | आगामी विधानसभा चुनाव के लिए जमीनी स्तर पर संगठन तैयार करना। |
| संगठनात्मक ढांचा | पार्टी को हर जिले और प्रखंड में सक्रिय बनाना। |