राज्यसभा चुनाव: उपेंद्र कुशवाहा का बड़ा दावा— “इज्जत बचाने के लिए उम्मीदवार नहीं उतारेगा महागठबंधन, विपक्ष के कई विधायक हमारे संपर्क में”

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाली चुनावी जंग अब मनोवैज्ञानिक स्तर पर पहुंच गई है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने विपक्ष यानी महागठबंधन की रणनीति पर सवाल उठाते हुए एक बड़ा राजनीतिक दावा किया है। कुशवाहा का मानना है कि एनडीए का पलड़ा इतना भारी है कि महागठबंधन हार के डर से अपना उम्मीदवार तक मैदान में उतारने का साहस नहीं जुटा पाएगा।

एनडीए की जीत तय, विपक्ष में मची है खलबली
राजधानी पटना में मीडिया से बात करते हुए उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि राज्यसभा की पांचों सीटों पर एनडीए की जीत पूरी तरह निश्चित है। उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा, “महागठबंधन की स्थिति इस वक्त बेहद नाजुक है। मुझे तो लगता है कि वे अपनी इज्जत बचाने के लिए इस बार राज्यसभा चुनाव में कोई उम्मीदवार ही नहीं उतारेंगे। अगर वे ऐसा करते हैं, तो उनकी हार तय है।” इतना ही नहीं, कुशवाहा ने यह कहकर सनसनी फैला दी कि विपक्षी खेमे के कई विधायक इस समय एनडीए के शीर्ष नेताओं के संपर्क में हैं।

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अपनी सीट पर उपेंद्र कुशवाहा का रुख
जब कुशवाहा से उनकी अपनी राज्यसभा दावेदारी के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने पुराने समझौतों की याद दिलाई। उन्होंने साफ लहजे में कहा, “विधानसभा चुनाव 2025 से पहले गठबंधन के भीतर यह बातचीत हुई थी कि एक एमएलसी और एक राज्यसभा सीट हमारे (रालोमो) हिस्से आएगी। फिलहाल, अंतिम निर्णय एनडीए के शीर्ष नेतृत्व को लेना है और हम गठबंधन धर्म का पालन करने के लिए तैयार हैं।”

पार्टी स्थापना दिवस और विधायकों की अनुपस्थिति
रालोमो के स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान पार्टी के दो प्रमुख विधायकों, माधव आनंद और रामेश्वर महतो की गैरमौजूदगी ने सियासी हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हालांकि, इन सवालों पर उपेंद्र कुशवाहा रक्षात्मक दिखे और सीधे जवाब देने के बजाय संगठनात्मक मजबूती की बात करने लगे। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी वर्तमान में पूरे बिहार में व्यापक सदस्यता अभियान चला रही है और उनका लक्ष्य संगठन को बूथ स्तर तक सक्रिय करना है।

राज्यसभा की 5वीं सीट का पेच
बता दें कि बिहार में राज्यसभा की चार सीटों का समीकरण तो स्पष्ट है (दो भाजपा और दो जदयू), लेकिन पांचवीं सीट को लेकर असली पेंच फंसा हुआ है। उपेंद्र कुशवाहा के इस ताजा बयान ने महागठबंधन पर दबाव बढ़ा दिया है, जबकि एनडीए के भीतर सीटों के तालमेल की सुगबुगाहट तेज कर दी है।

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