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पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल में खसरे (मीजल्स) के संदिग्ध मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की नींद उड़ा दी है। एम्स पटना से आई जांच रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद प्रशासन पूरी तरह सक्रिय हो गया है। प्रभावित क्षेत्रों में संक्रमण की कड़ी को तोड़ने के लिए अब 9 माह से लेकर 5 साल तक के सभी बच्चों को एमएमआर (MMR) का विशेष टीका लगाया जाएगा।
एम्स की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
बाढ़ अनुमंडल के दो प्रमुख टोलों से लिए गए नमूनों की जांच एम्स पटना में की गई थी, जिसके परिणाम पॉजिटिव आए हैं। पटना के सिविल सर्जन डॉ. योगेंद्र प्रसाद मंडल ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए पूरे इलाके में व्यापक स्तर पर टीकाकरण अभियान शुरू किया जा रहा है। मंगलवार को सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है, जिसमें रणनीति की समीक्षा की जाएगी।
टीकाकरण के लिए ‘माइक्रो-कंटेनमेंट’ रणनीति
जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी डॉ. अवधेश कुमार के अनुसार, यह संक्रमण अत्यंत संक्रामक है जो हवा के जरिए फैलता है। इसकी गंभीरता को देखते हुए विभाग ने माइक्रो-कंटेनमेंट रणनीति अपनाई है:
किसे लगेगा टीका: 9 माह से 5 वर्ष तक के सभी बच्चों को एहतियातन टीका दिया जाएगा।
अनिवार्यता: जिन बच्चों ने नियमित टीकाकरण के तहत पहले डोज ले ली है, उन्हें भी यह ‘बूस्टर’ सुरक्षा दी जाएगी ताकि सामूहिक प्रतिरक्षा (Herd Immunity) मजबूत हो सके।
विटामिन-ए: बच्चों को संक्रमण से लड़ने की शक्ति देने के लिए विटामिन-ए की खुराक भी दी जाएगी।
रैपिड रिस्पांस टीम और घर-घर सर्वे
स्वास्थ्य विभाग की रैपिड रिस्पांस टीम (RRT) अब जमीन पर उतर चुकी है। आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को घर-घर जाकर सर्वे करने और छूटे हुए बच्चों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी विशेष स्क्रीनिंग अभियान चलाया जाएगा। अगले 28 दिनों तक पूरे क्षेत्र को कड़ी निगरानी में रखा जाएगा।
अभिभावकों के लिए चेतावनी
डॉ. अवधेश कुमार ने अपील की है कि यदि बच्चों में तेज बुखार, शरीर पर लाल दाने, खांसी या आंखों में लाली जैसे लक्षण दिखें, तो इसे नजरअंदाज न करें और तुरंत नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें। एमएमआर टीका पूरी तरह सुरक्षित है और सरकारी केंद्रों पर नि:शुल्क उपलब्ध है।