मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण ईंधन की सप्लाई चेन को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। ऐसे में भारत जैसे देश में, जहां करोड़ों घरों की रसोई LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) पर निर्भर है, यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर LPG ही हमारी पहली पसंद क्यों बनी हुई है? आइए, आसान शब्दों में समझते हैं कि क्यों CNG या हाइड्रोजन जैसी गैसें अब तक घरेलू रसोई में LPG का स्थान नहीं ले पाई हैं।

LPG की सबसे बड़ी खासियत इसका कम दबाव (Low Pressure) पर तरल बन जाना है। इसे मात्र 5-10 बार के दबाव पर लिक्विड में बदला जा सकता है। इससे एक छोटे और हल्के स्टील सिलेंडर में बहुत सारी गैस भरी जा सकती है। वहीं, इसके विपरीत, CNG को तरल बनाना कठिन है और इसे स्टोर करने के लिए 200-250 बार के अत्यधिक दबाव की जरूरत होती है। इतने दबाव के लिए सिलेंडर बहुत भारी और मोटे बनाने पड़ेंगे, जिन्हें किचन में रखना मुमकिन नहीं होगा। खाना पकाने के मामले में LPG एक ‘पावरहाउस’ है। बता दें, LPG जलने पर मीथेन या CNG की तुलना में लगभग ढाई गुना अधिक गर्मी पैदा करती है। ज्यादा हीट का मतलब है कि खाना जल्दी पकेगा और गैस की खपत भी कम होगी।

चूंकि LPG लिक्विड रूप में होती है, इसलिए इसे ट्रकों के जरिए देश के कोने-कोने तक, पहाड़ों से लेकर सुदूर गांवों तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है। पाइपलाइन बिछाने का भारी-भरकम खर्च और समय इसमें बाधा नहीं बनता। जानकारी के लिए बता दें कि सुरक्षा के लिहाज से भी LPG हवा से भारी होती है। लीक होने पर यह जमीन की सतह पर बैठ जाती है, जिससे इसकी गंध (जो इसमें मिलाई जाती है) का तुरंत पता चल जाता है। फिर हाइड्रोजन जैसी गैसें बहुत अधिक ज्वलनशील और विस्फोटक होती हैं। हालांकि, उन्हें घरों में सुरक्षित रूप से स्टोर करना और इस्तेमाल करना फिलहाल एक बड़ी तकनीकी चुनौती है।