Bihar EOU Update: टेंडर और योजनाओं की निगरानी के लिए नई ‘स्पेशल टीम’ गठित; माइनिंग पोर्टल में सेंधमारी करने वाले 62 केस रडार पर…

Ritu Raj

आर्थिक अपराध इकाई ने राज्य में सरकारी विभागों की टेंडर प्रक्रिया और योजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही अनियमितताओं को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। इसके तहत एक अधीक्षक के नेतृत्व में 5 सदस्यीय विशेष निगरानी टीम गठित की गई है, जो पूरे राज्य से आने वाली शिकायतों की जांच कर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करेगी।

पटना स्थित पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में ईओयू के पुलिस अधीक्षक पंकज कुमार ने बताया कि टेंडर आमंत्रण, आवंटन और योजनाओं के क्रियान्वयन में गड़बड़ी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिसके मद्देनजर इस विशेष टीम का गठन किया गया। यह टीम पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में काम करेगी, जिसमें डीएसपी और निरीक्षक रैंक के अधिकारी शामिल होंगे। इसका उद्देश्य शिकायतों का सत्यापन कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करना और सिस्टम में पारदर्शिता व निष्पक्षता लाना है। इसी बीच में नॉर्थ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के कार्यपालक अभियंता मनोज कुमार रजक के खिलाफ 16 मार्च 2026 को आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया गया है। प्रारंभिक जांच में पाया गया कि उन्होंने अपनी ज्ञात आय से करीब 62.66 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की है। जांच के दौरान जमीन, आभूषण और बैंक खातों से जुड़े कई अहम दस्तावेज मिले हैं, साथ ही कुछ संपत्तियां नेपाल में रिश्तेदारों के नाम पर खरीदे जाने की बात भी सामने आई है, जिससे जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है।

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इसके अलावा, ईओयू ने करीब 21 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन से जुड़े दो बड़े मामलों को प्रवर्तन निदेशालय को सौंप दिया है, जहां प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत आगे की जांच की जा रही है। वहीं, अवैध खनन के मामलों में भी इकाई ने कड़ा रुख अपनाते हुए लगभग 350 करोड़ रुपये के नुकसान से जुड़े 62 मामलों की निगरानी शुरू की है। जांच में राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के कुछ अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है, जिन्होंने 17 जिलों में लाइसेंस धारकों के साथ मिलकर खनन पोर्टल में तकनीकी छेड़छाड़ की, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ। ईओयू का कहना है कि सभी मामलों की गहन जांच कर दोषियों की पहचान की जाएगी और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। इस पूरी पहल को सरकारी तंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिससे भविष्य में भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मदद मिल सकती है।

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