1 अप्रैल से नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ आम लोगों की जेब पर असर डालने वाले कई बदलाव लागू हो सकते हैं। इनमें जमीन के सर्किल रेट में बड़ी बढ़ोतरी, प्राइम टाइम में बिजली महंगी होना, और 20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल जैसे फैसले शामिल हैं।
बिहार में सरकार जमीन का सर्किल रेट 3 से 4 गुना तक बढ़ाने की तैयारी में है। खासकर पटना जैसे शहरी इलाकों में जमीन की सरकारी कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। उदाहरण के तौर पर, जहां अभी एक डिसमिल जमीन का सर्किल रेट करीब 40 लाख रुपये है, उसे बढ़ाकर 1.5 से 4 करोड़ रुपये तक किया जा सकता है। इससे जमीन की रजिस्ट्री कराने का खर्च भी काफी बढ़ जाएगा। दरअसल, सर्किल रेट वही न्यूनतम सरकारी दर होती है, जिस पर जमीन की खरीद-बिक्री दर्ज की जाती है। इसी के आधार पर स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस तय होती है। सर्किल रेट बढ़ने का सीधा मतलब है कि सरकार को अधिक राजस्व मिलेगा, लेकिन खरीदारों को ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। बताया जा रहा है कि सरकार ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है और कैबिनेट की मंजूरी के बाद इसे लागू किया जा सकता है। लंबे समय से, यानी 2013 के बाद, सर्किल रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ था, इसलिए अब इसे बाजार दरों के करीब लाने की कोशिश की जा रही है।
इस संभावित बढ़ोतरी की खबर के बाद लोग तेजी से जमीन की रजिस्ट्री करा रहे हैं। रजिस्ट्रेशन की संख्या में काफी वृद्धि हुई है, जिससे सरकार का राजस्व भी बढ़ा है। सिर्फ जमीन ही नहीं, बिजली भी महंगी हो सकती है। खासतौर पर शाम के समय, जिसे प्राइम टाइम कहा जाता है, बिजली दरों में लगभग 20% तक की बढ़ोतरी की जा सकती है। इसके अलावा रेलवे ने टिकट कैंसिलेशन पर मिलने वाले रिफंड के नियमों में बदलाव किया है, जिससे यात्रियों को पहले की तुलना में कम पैसा वापस मिल सकता है। साथ ही, पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण लागू करने की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं। इसका उद्देश्य ईंधन आयात पर निर्भरता कम करना और पर्यावरण को बेहतर बनाना है, हालांकि इसका असर कीमतों पर भी पड़ सकता है। कुल मिलाकर, नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत कई आर्थिक बदलावों के साथ होगी, जिनका सीधा असर आम लोगों के खर्च पर देखने को मिल सकता है।