बिहार में गर्मी बढ़ते ही हर साल एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या फिर से चिंता का कारण बन जाती है—इसे आम बोलचाल में “चमकी बुखार” कहा जाता है, जबकि चिकित्सा भाषा में इसे Acute Encephalitis Syndrome (AES) कहा जाता है। यह बीमारी खासकर छोटे बच्चों के लिए बेहद खतरनाक होती है और समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी साबित हो सकती है।

क्या है चमकी बुखार?
चमकी बुखार दरअसल दिमाग से जुड़ी एक गंभीर बीमारी है, जिसमें मस्तिष्क में सूजन आ जाती है। इससे शरीर का केंद्रीय तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है। इस स्थिति में बच्चों को अचानक झटके (ऐंठन) आने लगते हैं, जिन्हें स्थानीय भाषा में “चमकी” कहा जाता है। कई मामलों में बच्चे बेहोश हो जाते हैं या उनकी स्थिति तेजी से बिगड़ जाती है।

किन बच्चों को ज्यादा खतरा?
यह बीमारी मुख्य रूप से 1 से 10 साल तक के बच्चों को प्रभावित करती है, खासकर कुपोषित बच्चे को, गरीब या ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चे और जो बच्चे अक्सर खाली पेट सो जाते हैं। वहीं, मुजफ्फरपुर और उसके आसपास के जिले इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र माने जाते हैं।

कब बढ़ता है खतरा?
हर साल जून और जुलाई के महीनों में इसके मामले तेजी से बढ़ते हैं। यह वही समय होता है जब तेज गर्मी और उमस होती है। लू का प्रकोप रहता है और जब लीची का मौसम होता है।
बीमारी के मुख्य कारण;
– खाली पेट सोना, जिससे ब्लड शुगर गिर जाता है
– कुपोषण
– शरीर में पानी की कमी
– अत्यधिक गर्मी और लू
– कच्ची या अधपकी लीची का सेवन, – लीची में मौजूद कुछ प्राकृतिक टॉक्सिन कुपोषित बच्चों के लिए खतरनाक हो सकते हैं। खासकर जब बच्चा खाली पेट लीची खाता है, तब ब्लड शुगर अचानक कम हो सकता है, जिससे दिमाग पर गंभीर असर पड़ता है।

लक्षण क्या हैं?
– तेज बुखार
– अचानक झटके (ऐंठन)
– बेहोशी
– उल्टी या कमजोरी
– भ्रम की स्थिति
सरकार और अस्पतालों की तैयारी;
इस खतरे को देखते हुए बिहार में स्वास्थ्य विभाग ने कई अहम कदम उठाए हैं। Patna Medical College and Hospital में बच्चों के लिए विशेष बेड आरक्षित किए गए हैं। साथ ही लू वार्ड और ICU की व्यवस्था की गई है। PHC और CHC को अलर्ट पर रखा गया है। वहीं, 102 एम्बुलेंस सेवा को सक्रिय किया गया है। 44 जरूरी दवाओं का स्टॉक सुनिश्चित किया गया है। डॉक्टरों और नर्सों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। फिर डिजिटल प्लेटफॉर्म से निगरानी की गई है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए ग्राम परिवहन योजना के वाहनों को भी सक्रिय किया गया है।
जांच कैसे होती है?
चमकी बुखार की पुष्टि के लिए डॉक्टर कई तरह की जांच करते हैं:-
1) MRI या CT स्कैन
2) खून और पेशाब की जांच
3) लंबर पंक्चर (रीढ़ से द्रव जांच)
4) गंभीर मामलों में मस्तिष्क की बायोप्सी
बचाव के लिए जरूरी सावधानियां;
विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने अभिभावकों को कुछ जरूरी सलाह दी है:
1) बच्चों को कभी खाली पेट न सुलाएं और रात में पौष्टिक या मीठा जरूर खिलाएं।
2) तेज बुखार होने पर तुरंत शरीर को ठंडा करें।
3) दोपहर 12 से 4 बजे तक बच्चों को बाहर न जाने दें।
4) बाहर निकलने पर पूरे शरीर को ढककर रखें।
5) पर्याप्त पानी और पौष्टिक भोजन दें।
क्यों जरूरी है सतर्कता?
चमकी बुखार हर साल बिहार में सैकड़ों बच्चों को अपनी चपेट में लेता है। कई मामलों में यह जानलेवा भी साबित होता है। लेकिन अच्छी बात यह है कि सही जानकारी, समय पर इलाज और थोड़ी सावधानी से इस बीमारी से बचाव संभव है।