सिटी पोस्ट लाइव : भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह 16 महीने बाद आज एक बार फिर बीजेपी जॉइन करेंगे. पवन सिंह ने हाल ही में दिल्ली में गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा से मुलाकात की थी.माना जा रहा है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले भाजपा ने यह कदम जातीय समीकरणों को साधने के लिए उठाया है. अब पवन सिंह के विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चा है. जानकारी के मुताबिक, पवन सिंह को बीजेपी आरा या काराकाट से टिकट दे सकती है.
पवन सिंह पहली बार 2017 में भाजपा में शामिल हुए थे, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी के खिलाफ जाकर उन्होंने काराकाट से निर्दलीय चुनाव लड़ा. निर्दलीय चुनाव लड़ने पर 22 मई 2024 को भाजपा ने पवन सिंह को पार्टी से बाहर कर दिया. उस वक्त वे प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य थे.हालांकि, अब पवन सिंह का कहना है कि, ‘मैं कभी भाजपा से दूर नहीं गया था, बस परिस्थितियां अलग थीं.’ उनके बीजेपी में वापसी के बाद शाहाबाद (भोजपुर, बक्सर, रोहतास और कैमूर) की 22 विधानसभा सीटों पर फायदा हो सकता है.
भोजपुर सुपर स्टार और सिंगर पवन सिंह 30 सितंबर को भाजपा में लौट आए. उनकी वापसी भाजपा के बिहार प्रभारी विनोद तावड़े ने कराई.मंगलवार, 30 सितंबर सुबह पवन सिंह तावड़े और भाजपा नेता ऋतुराज सिन्हा के साथ राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) सुप्रीमो उपेंद्र कुशवाहा से मिलने दिल्ली स्थित उनके आवास गए. पवन सिंह ने कुशवाहा से आशीर्वाद लिया.इसके बाद तावड़े ने पवन सिंह के भाजपा में आने का ऐलान किया. उन्होंने कहा, ‘पवन सिंह भाजपा कार्यकर्ता के तौर पर काम करते हुए NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) को मजबूत करेंगे.’कुशवाहा से मुलाकात के बाद पवन सिंह गृह मंत्री अमित शाह से मिले. पवन सिंह के भाजपा में वापस आने से पहले सोमवार, 29 सितंबर रात विनोद तावड़े और राष्ट्रीय सचिव ऋतुराज सिन्हा ने कुशवाहा से मुलाकात की थी.कुशवाहा को पवन सिंह के बारे में जानकारी दी. उनकी सहमति के बाद ही अगली सुबह पवन सिंह को लेकर दोनों नेता उनके घर गए.
हाल ही में उन्होंने बिजनेस टायकून अशनीर ग्रोवर की रियलिटी शो ‘राइज एंड फॉल’ को छोड़ दिया. शो से बाहर आने के दौरान उन्होंने कहा था- ‘मेरी जनता ही मेरा भगवान है और चुनाव के समय मेरा फर्ज है कि मैं उनके बीच रहूं.इस बयान के बाद यह साफ हो गया कि पवन सिंह अब पूरी तरह से राजनीति में एक्टिव होने जा रहे हैं.पवन सिंह को बीजेपी में दोबारा आने की 2 बड़ी बजह है. पहला- शाहाबाद का जातीय समीकरण. दूसरा- पवन सिंह की लोकप्रियता और चुनाव लड़ने की जिद..
पवन सिंह भोजपुर जिले से आते हैं. राजनीतिक दृष्टिकोण से यह शाहाबाद एरिया का हिस्सा है. शाहाबाद में 4 जिले भोजपुर, बक्सर, रोहतास और कैमूर आते हैं, जिनमें 22 विधानसभा सीटें हैं.शाहाबाद की राजनीति को यादव, कुशवाहा और राजपूत प्रभावित करते हैं। करीब 10 से 12% कुशवाहा और राजपूत करीब 15% तक हैं. राजपूतों का ज्यादा असर रोहतास और भोजपुर में हैं. इस एरिया में यादव करीब 20% तक हैं. यही कारण है कि तीनों में से कोई दो जाति अगर एक साथ मिलती है तो समीकरण बदल जाता है.पवन सिंह राजपूत समाज से आते हैं. माना जाता है कि उस एरिया में पवन सिंह के पीछे उनका समाज मजबूती से खड़ा है.…
आरके सिंह की नाराजगी के बाद उस एरिया में NDA को राजपूत वोटरों को साथ रखने के लिए किसी मजबूत चेहरे की जरूरत थी. पवन सिंह के साथ आने से यह पूरा हो सकता है. पवन सिंह की लोकप्रियता और चुनाव लड़ने की जिदः भोजपुरी बेल्ट में पवन सिंह खासे लोकप्रिय हैं. ‘पवन सिंह की लोकप्रियता भोजपुरी भाषी ग्रामीण और शहरी वोटरों में बराबर है. इसलिए उन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल था. पवन सिंह ने चुनाव लड़ने का मन बना लिया था. ऐसे में भाजपा ने सोचा कि अगर उन्हें नहीं मनाया गया तो लोकसभा चुनाव की तरह नुकसान पहुंचा सकते हैं.’