सिटी पोस्ट लाइव
पटना अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को मरीजों की बढ़ती संख्या और बेहतर इलाज की मांग को देखते हुए बड़ी सौगात मिली है। अस्पताल में इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर के लिए 200 नए आईसीयू बेड बढ़ाए जाएंगे, जिससे कुल बेड की संख्या 330 हो जाएगी। इसके अलावा, एक अत्याधुनिक कैंसर सेंटर और धर्मशाला का भी निर्माण किया जाएगा। यह घोषणा मंगलवार को एम्स पटना के कार्यकारी निदेशक सौरव वार्ष्णेय ने शासी निकाय की बैठक में की।
बेड की कमी होगी दूर
गंभीर मरीजों को अब बेड की कमी के कारण वापस नहीं लौटना पड़ेगा। दिसंबर तक इमरजेंसी-ट्रॉमा सेंटर में ये 200 आईसीयू बेड जुड़ जाएंगे। इन सभी बेड पर वेंटिलेटर समेत तमाम अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही, क्रिटिकल केयर यूनिट भवन का निर्माण भी लगभग पूरा हो चुका है। कंपनी सोशल रिस्पांसिबिलिटी फंड से बन रहा बर्न यूनिट का भवन भी तैयार हो गया है, जिससे जले हुए मरीजों का बेहतर इलाज संभव होगा।
अंग प्रत्यारोपण और अन्य सुविधाएं
एम्स पटना में अंग प्रत्यारोपण की सुविधा को भी विस्तार दिया जा रहा है। वर्तमान में कॉर्निया और किडनी का प्रत्यारोपण हो रहा है, जबकि भविष्य में लिवर और अन्य अंगों के प्रत्यारोपण की सुविधा भी शुरू की जाएगी। बैठक में पटना साहिब के सांसद रविशंकर प्रसाद और कटिहार के सांसद तारिक अनवर भी मौजूद थे। उन्होंने मरीजों को बेहतर सुविधाएं देने पर जोर दिया।
रविशंकर प्रसाद ने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत एम्स पटना में इलाज कराने वाले गरीबों के 50 करोड़ रुपये से अधिक की बचत हुई है। उन्होंने फैकल्टी और डॉक्टरों के लिए एम्स परिसर में ही आवास उपलब्ध कराने की भी बात कही, जिसके लिए नए भवनों का निर्माण कार्य चल रहा है।
नए प्रेसिडेंट का पदभार और भविष्य की योजनाएं
बैठक में एसजीपीजीआई लखनऊ के निदेशक डॉ. राधाकृष्णन धीमान ने एम्स पटना के नए प्रेसिडेंट के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्होंने अस्पताल में मरीजों के लिए बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के साथ-साथ शोध, शिक्षण और प्रशिक्षण सुविधाओं के विकास की अपनी योजनाएं प्रस्तुत कीं। सांसद रविशंकर प्रसाद ने रिक्त फैकल्टी और कर्मचारियों के पदों को जल्द से जल्द भरने की मांग की।
अत्याधुनिक कैंसर सेंटर का निर्माण
बिहार सरकार से 27 एकड़ जमीन लेकर एक अत्याधुनिक कैंसर सेंटर का निर्माण कराया जाएगा, जिससे कैंसर के मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा। कटिहार, पूर्णिया और सीमांचल के मरीजों की बड़ी संख्या को देखते हुए उनके लिए जल्द ही एक धर्मशाला की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।
डॉ. कुमार सिद्धार्थ को पदमुक्त किया गया
बैठक में डॉ. कुमार सिद्धार्थ को उनके पद से हटा दिया गया। उन पर गलत ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी पाने का आरोप है। इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है और उनके खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की गई है। इसके अलावा, ओबीसी आयोग के निर्देशानुसार, इस श्रेणी में नियुक्त सभी डॉक्टरों को अपने प्रमाणपत्र और माता-पिता की नौकरी का विवरण जमा करने को कहा गया है। कार्यकारी निदेशक डॉ. सौरव वार्ष्णेय ने बताया कि इस तरह की कार्रवाई जांच के बाद एक सामान्य प्रक्रिया है।