कांग्रेसियों को भी समझ नहीं आ रही राहुल गांधी की राजनीति, राहुल नहीं सरकार का दे रहे साथ .

Manisha Kumari

सिटी पोस्ट लाइव :ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत के सभी राजनीतिक दलों ने जो एकजुटता दिखाई, वह एक मिसाल है.सभी  राजनीतिक दलों ने भी इस सैन्य अभियान के दौरान केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को पूरा समर्थन दिया. कांग्रेस पार्टी और उसके नेता राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे सरकार को समर्थन देते नजर आये. लेकिन, ऑपरेशन सिंदूर पर अस्थाई ब्रेक लगने के बाद लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस ने जिस तरह से इस सैन्य अभियान पर सवाल उठाए हैं, उसको लेकर कांग्रेस पार्टी में एक राय नहीं है.

पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और ऑपरेशन सिंदूर पर राहुल गांधी की राजनीति को कांग्रेस के अंदर ही पूरा समर्थन नहीं मिल रहा है. अब कट्टर मोदी विरोधी कांग्रेसी भी कैंद्र के साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं.कांग्रेस के शीर्ष नेताओं की लाइन से अलग हटकर पूरी तरह से सरकार, भारतीय सशस्त्र सेना का नजरिया मानने वालों में वे कांग्रेसी नेता भी शामिल हैं, जो कभी प्रमुख मोदी-विरोधी नेता के रूप में जाने जाते रहे हैं.राहुल  गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की अगुवाई वाली कांग्रेस पार्टी इस दावे के साथ मोदी सरकार को घेरने की कोशिश करती रही कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ सीजफायर करवाने में मध्यस्थता की, जो कि भारत की स्थापित कूटनीति के खिलाफ है. जबकि, ट्रंप  खुद भी अपने इस दावे से पीछे हट चुके हैं.

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अब कांग्रेस के सलमान खुर्शीद जैसे नेता भी अपनी पार्टी की लाइन को गलत ठहरा रहे हैं. पूर्व विदेश राज्यमंत्री सलमान खुर्शीद कांग्रेस ऑपरेशन सिंदूर के मुद्दे पर जिस तरह से विदेश में जाकर भारत का पक्ष रखने के मोदी सरकार की पहल का समर्थन किया है और खुद इसका हिस्सा बनने को तैयार हुए हैं, वह उन्हें इस मुद्दे पर राहुल और खरगे की अगुवाई वाली पार्टी की नीतियों से दूर कर रहा है.मोदी सरकार की ओर से ऑल पार्टी डेलिगेशन में शामिल कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी भी पीएम मोदी की नीतियों के घोर-विरोधियों में गिने जाते रहे हैं. लेकिन, वे न केवल इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनने के लिए तैयार हुए हैं, बल्कि हर देशभक्त को ऑपरेशन सिंदूर के मसले पर एक ही तरह से बर्ताव करने का संदेश भी दे रहे हैं.

कांग्रेसी नेता  शशि थरूर  ने पहलगाम आतंकी हमले से लेकर ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद भारत सरकार की कूटनीति का जमकर समर्थन किया है. उन्होंने यह साहस तब दिखाया है, जब पार्टी के अंदर से उनके लिए सरकार के समर्थन में खड़े होने के लिए लक्ष्मण रेखा खींचने तक की मांग उठ चुकी हैं. राहुल ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के बयानों पर कुछ इस तरह के सवाल उठाए, जिसे पाकिस्तान में हाथों-हाथ लिया गया. लेकिन, प्रधानमंत्री मोदी के कट्टर आलोचकों में गिने जाने वाले चिदंबरम ने इस विवाद पर दो टूक कह दिया कि जब विदेश मंत्रालय ने इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण दे दिया है तो मेरे लिए कुछ कहने को नहीं बच गया है.

कांग्रेस पर राहुल गांधी की राजनीति का असर ये है कि पार्टी आल पार्टी डेलीगेशन  विदेश भेजे जाने के मकसद पर ही अब सवाल उठाने लगी है. पार्टी महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने मीडिया से बात में यहां तक कह दिया है कि ‘ध्यान भटकाने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल को विदेश भेजा जा रहा है.’ लेकिन, लगता है कि इस बार कांग्रेस के घोर-मोदी विरोधियों ने भी देश के मुद्दे पर पार्टी के लिए सियासत की लंबी ‘लक्ष्मण रेखा’ खींच दिया है.

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