किससे ‘बदला’ लेने आ रहे पवन सिंह और मनीष कश्यप,राजपूत-EBC को साधकर बढ़ाएंगे टेंशन?

Rahul
By Rahul

सिटी पोस्ट लाइव :  भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह और यूट्यूबर से नेता बने मनीष कश्यप की हालिया मुलाकात से सियासी गलियारों में ने नई चर्चा शुरू हो गई है. लखनऊ में हुई इस मुलाकात ने सवाल उठाया है कि क्या ये दोनों मिलकर NDA के लिए चुनौती बन सकते हैं?बिहार विधानसभा चुनाव के कुछ ही महीने बचे हैं और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. विभिन्न राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिशें भी तेज हो गई हैं. मनीष कश्यप और पवन सिंह की मुलाकात की एक तस्वीर वायरल हो रही है, जिससे कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

दरअसल, पीएमसीएच में मनीष कश्यप के साथ मारपीट की घटना के बाद से वे बीजेपी से नाराज थे. नाराजगी के चलते उन्होंने बीजेपी छोड़ने की घोषणा कर दी थी और बताया कि वे जल्द ही अपने अगले कदम की घोषणा करेंगे. इसी बीच उन्होंने लखनऊ में  पवन सिंह  से मुलाकात की, जिससे राजनीतिक हलचल और बढ़ गई है. लखनऊ में पवन सिंह और मनीष कश्यप की मुलाकात की तस्वीर सामने आई है, जिसमें पवन सिंह की मां भी हैं, जो दोनों को आशीर्वाद दे रही हैं.

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बीजेपी से अलग होने के बाद मनीष कश्यप और पवन सिंह की मुलाकात को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सूत्रों के अनुसार, पीएमसीएच में मारपीट की घटना के बाद पवन सिंह ने मनीष कश्यप का हालचाल फोन पर लिया था, जिससे उनके संबंध बेहतर हो गए थे.पवन सिंह ने 2024 के लोकसभा चुनाव में काराकाट सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़कर NDA को शाहाबाद क्षेत्र में बड़ा झटका दिया था. उनकी लोकप्रियता, खासकर राजपूत और युवा मतदाताओं के बीच, ने NDA के जातिगत समीकरण को गड़बड़ा दिया, जिसके चलते काराकाट, आरा, बक्सर, और औरंगाबाद जैसी सीटों पर NDA को हार का सामना करना पड़ा. पवन सिंह ने बीजेपी से टिकट न मिलने के बाद बगावत की थी और निर्दलीय मैदान में उतरे थे. अब उनकी पत्नी ज्योति सिंह ने भी 2025 के विधानसभा चुनाव में उतरने की घोषणा की है, जिससे NDA की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.

 मनीष कश्यप, जो अपने बेबाक यूट्यूब वीडियो और सामाजिक मुद्दों पर मुखर रुख के लिए जाने जाते हैं, ने हाल ही में बीजेपी छोड़ दी. उनका कहना था कि पार्टी उनकी उपेक्षा कर रही थी. मनीष की ग्रामीण बिहार में खासकर युवाओं और EBC (अति पिछड़ा वर्ग) समुदायों में अच्छी पकड़ मानी जाती है. उनकी पवन सिंह से मुलाकात ने अटकलों को हवा दी है कि दोनों मिलकर किसी नए सियासी गठजोड़ की नींव रख सकते हैं या निर्दलीय उम्मीदवारों के रूप में NDA के वोट बैंक में सेंधमारी कर सकते हैं.

पवन सिंह का प्रभाव भोजपुरी भाषी क्षेत्रों में है, जहां उनकी फैन फॉलोइंग और राजपूत वोटरों पर पकड़ NDA के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है. मनीष कश्यप का सोशल मीडिया प्रभाव और EBC समुदायों में समर्थन RJD और NDA दोनों के लिए चुनौती बन सकता है. अगर ये दोनों किसी तीसरे मोर्चे या निर्दलीय गठजोड़ के तहत मैदान में उतरते हैं, तो वोटों का बंटवारा NDA को नुकसान पहुंचा सकता है, जैसा कि 2024 में देखा गया था.

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