चुनाव में किसका खेल ख़राब करेगीं नई पार्टियां,,खिसका पायेगीं लालू-नीतीश का जनाधार?

City Post Live

Bihar Politics:

सिटी पोस्ट लाइव :  विधानसभा चुनाव से पहले बिहार की राजनीति में उथल-पुथल  मची हुई है. बिहार के कई बड़े नेता  पाला बदलकर रहे हैं या फिर  खुद की पार्टी बना रहे है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये पार्टियां बिहार के दो दिग्गज लालू यादव और नीतीश कुमार की पार्टी के जनाधार में सेंध लगा पाएंगी या फिर पानी का बुलबुला बनकर रह जाएंगी.देशभर में चुनावी रणनीतिकार के रूप में पहचान बनानेवाले  प्रशांत किशोर (PK), अब सक्रिय रूप से बिहार की राजनीति में उतर चुके हैं. उन्होंने 2 अक्टूबर 2024 को गांधी जयंती के दिन जन सुराज पार्टी का गठन किया. जन सुराज का एजेंडा है, सही लोग, सही सोच और सामूहिक प्रयास. पार्टी बिहार में शराबबंदी खत्म करने, रोजगार सृजन, शिक्षा सुधार और पलायन रोकने जैसे मुद्दों पर फोकस कर रही है. पीके की रणनीति है जाति-वर्ग से ऊपर उठकर गरीब, पढ़े-लिखे और युवा वर्ग को जोड़ना. 

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  अखिल भारतीय पान महासंघ के अध्यक्ष इंजीनियर आईपी गुप्ता ने पिछले दिनों पटना के गांधी मैदान में एक जनसभा करके अपनी  इंडियन इंकलाब पार्टी के गठन की घोषणा की. इस दौरान गुप्ता ने अपने भाषण में कहा कि जैसे यादव, कुशवाहा, पासवान और अन्य समाज के नेताओं ने अपनी-अपनी पार्टियां खड़ी की हैं, वैसे ही अब तांती-ततवा समाज भी अपनी राजनीतिक पहचान बनाएगा. हमारी पार्टी का मुख्य एजेंडा पान समाज को आरक्षण और राजनीतिक भागीदारी दिलाना है. गुप्ता का दावा है कि जिस तरह दूसरे समुदायों ने अपनी एकता से सत्ता में हिस्सेदारी पाई, वैसे ही उनका समाज भी अब संगठित होकर आगे बढ़ेगा. 

बिहार के लोकप्रिय पूर्व आईपीएस अधिकारी शिवदीप लांडे,  ने हिंद सेना पार्टी के नाम से नई पार्टी बनाई है. अप्रैल 2025 में इस पार्टी की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य बिहार में “सच्चा बदलाव” लाना है. लांडे ने यह भी खुलासा किया कि उन्हें कई राजनीतिक दलों ने मंत्री पद और राज्यसभा सीट का प्रस्ताव दिया था, लेकिन उन्होंने अपनी स्वतंत्र पार्टी बनाकर युवाओं के मुद्दों पर राजनीति करने का निर्णय लिया है. उनकी पार्टी का फोकस मुख्यतः युवा वोटबैंक और सत्ता में नैतिकता की बहाली पर है.

एक समय नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद सहयोगी रहे आरसीपी सिंह अब अपनी पार्टी बना चुके हैं.जेडीयू से निष्कासन और बीजेपी में अल्पकालिक भूमिका के बाद आरसीपी सिंह ने स्वतंत्र राजनीतिक राह चुनी. उनकी पार्टी का मुख्य उद्देश्य कुर्मी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को मज़बूत करना है. बिहार की राजनीति में कुर्मी समुदाय को ‘लव-कुश’ समीकरण में महत्वपूर्ण माना जाता है, और आरसीपी इस समीकरण को पुनः अपने पक्ष में करना चाहते हैं. 

अमरकांत साहू ने राष्ट्रीय प्रगति पार्टी बनाई है.हाल ही में चर्चा में तब आई जब इस पार्टी का राजद में विलय हो गया. साहू वैश्य समाज से आते हैं, और उनका राजद में शामिल होना इस बात का संकेत है कि लालू प्रसाद यादव अब वैश्य समाज में भी अपनी पैठ बनाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. साहू ने 29 अप्रैल को भामा शाह जयंती के अवसर पर आरजेडी कार्यालय में लालटेन थामा. यह कदम उन नई सामाजिक जोड़-तोड़ों का हिस्सा है, जो बिहार की राजनीति को 2025 के चुनाव से पहले बदल सकते हैं.

क्या ये पार्टियां जो चुनाव से महज कुछ महीने पहले बनी है, ये  लालू यादव और नीतीश कुमार के वोट बैंक में सेंध लगा पाएगीं. इस सवाल के जवाब में बिहार की राजनीति पर नजर रखने वाले पत्रकार बताते हैं कि इन सभी पार्टियों का जनता के बीच में कोई जनाधारनहीं है. हालांकि जन सुराज कुछ मामलों में इन सबसे आगे है. लेकिन अभी वह किसी दुसरे को हारने और जिताने का ही दमखम रखता है.खुद चुनाव जितने के लिए उसे लम्बा संघर्ष करना पड़ सकता है. लेकिन इतना तय है कि इस चुनाव में जन-सुराज दोनों गठबन्धनों के वोट बैंक में सेंधमारी करेगा.इसीलिए सबके निशाने पर केवल प्राशांत किशोर हैं.

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