जमीन सर्वे करवा चुके जमीन मालिकों को बड़ी राहत.

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सिटी पोस्ट लाइव : बिहार में जमीन सर्वा करवा चुके जमीन मालिकों के लिए राहत वाली खबर है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने इन जमीन मालिकों को अपनी आपत्ति दर्ज करने की मोहलत दे दी है. 90 दिनों के भीतर ही आपत्ति पर सुनवाई की जाएगी. 953 गांवों के रैयत अब भी अपनी आपत्ति दर्ज कर सकते हैं. विभाग के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने सोमवार को इन गांवों से जुड़े बंदोबस्त पदाधिकारियों को आदेश जारी कर दिया है. सर्वे के अंतिम अधिकार प्रकाशन के शुरू होने 90 दिनों के भीतर ही बंदोबस्त पदाधिकारी रैयतों के दावा आपत्ति पर सुनवाई कर सकते हैं. यह समय सीमा समाप्त होने के बाद भी कई जिलों के रैयत बंदोबस्त पदाधिकारी के यहां दावा-आपत्ति दाखिल कर रहे थे.

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जिलों से मुख्यालय से दिशा निर्देश मांगा जा रहा  था. जिलों के पत्र के आधार पर विधि विभाग की राय यह आई कि अंतिम अधिकार अभिलेख के प्रकाशन के बाद सुनवाई के लिए पहले से तय अवधि बढ़ाई जा सकती है. इसके बारे में विभाग अपने स्तर से निर्णय ले सकता है.वह सक्षम है. अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि यह आदेश सिर्फ उन्हीं गांवों के लिए है, जहां भूमि सर्वेक्षण पूरा हो चुका है. राज्य के बाकी हिस्से में सर्वे पहले की तरह चलेगा.गौरतलब है कि जमीन सर्वे का  उद्देश्य राज्य की सभी जमीनों का विस्तृत और सटीक सर्वेक्षण करना है. इस सर्वेक्षण के माध्यम से जमीन के रिकॉर्ड को अपडेट किया जाएगा, जिसके जरिए जमीन से जुड़े विवादों का समाधान किया जाएगा और भविष्य में होने वाली जमीन संबंधी समस्याओं को रोका जाएगा.

जमीन सर्वे के जरिये आधुनिक तकनीक के माध्यम से पुराने और अधूरे भूमि अभिलेखों को अद्यतन किया जा रहा है.इससे भूमि सीमा विवाद, स्वामित्व विवाद और अन्य संबंधित विवादों का समाधान होगा. सर्वेक्षण डेटा का उपयोग भूमि उपयोग नियोजन और कृषि, उद्योग और अन्य गतिविधियों के लिए भूमि के उचित आवंटन में सहूलियत होगी. सटीक भूमि अभिलेखों से राजस्व संग्रह में सुधार होगा. विकास कार्यों के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पारदर्शी और आसान होगी. javascript:false

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