बिहार कांग्रेस के संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी, लालू यादव को भी राहुल दे चुके हैं संकेत.

City Post Live

सिटी पोस्ट लाइव :19 दिन में राहुल गांधी की दूसरी बिहार यात्रा से राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज है.एक तरफ इसे  कांग्रेस को राज्य में अपनी स्थिति मजबूत करने की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है.दूसरी तरफ कुछ लोगों का मानना है कि राहुल गांधी का बिहार दौरा अखिलेश प्रसाद सिंह को अध्यक्ष पद से हटाने की उनके विरोधियों के रणनीति का हिस्सा है.सूत्रों के अनुसार प्रदेश अध्यक्ष पद से अखिलेश सिंह को हटाने के बाद कांग्रेस पार्टी बिहार चुनाव में कुछ बोल्ड डिसीजन ले सकती है.मसलन पर्याप्त और मन-पसंद सीटें नहीं मिलने पर कांग्रेस अकेले चुनाव मैदान में उतर सकती है.

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बताया जा रहा है कि अगले कुछ महीने में कांग्रेस अपने संगठन में भी बदलाव कर सकती है.इसमें दलितों और EBC को तव्वजो दे सकती है.स्वतंत्रता सेनानी जगलाल चौधरी की जयंती समारोह में राहुल गांधी का आना एक बड़ा मामला है. दिवंगत चौधरी बिहार कांग्रेस कमेटी के सदस्य और राज्य सरकार में मंत्री रहे हैं. वह कांग्रेस के दलित नेता रहे हैं. 18 जनवरी और 5 फरवरी को बिहार दौरे पर आए राहुल गांधी ने दलितों और अति पिछड़ा वोट बैंक को साधने की कोशिश की. उन्होंने जातीय जनगणना कराने का वादा किया.  राहुल गांधी ने बिहार की जातीय जनगणना को फर्जी बताकर एक तरह से लालू-तेजस्वी यादव को भी संकेत दिया है.

बिहार में हुए जातीय सर्वे का क्रेडिट तेजस्वी यादव लेते रहे हैं.राहुल गांधी के बयान के बाद RJD असहज है.पटना दौरे के दौरान राहुल गांधी ने कहा था- ‘हमने इतिहास की किताब में दलितों के बारे में सिर्फ दो लाइन पढ़ी हैं. दलित और अछूत. आपका कोई इतिहास नहीं है क्या? दो लाइन से आपका दर्द मिट जाएगा क्या?’‘मोदी सरकार नहीं चाहती है कि देश में जातीय जनगणना हो, लेकिन मैं चाहता हूं कि दलित, ओबीसी आदिवासी को उनकी भागीदारी मिले.राहुल गांधी बीते एक साल से हर जगह जातीय जनगणना कराने का वादा कर रहे हैं. साथ ही सामाजिक न्याय की लड़ाई करने का दावा कर रहे हैं.

वे मोदी सरकार को हिस्सेदारी के मुद्दे पर घेर रहे हैं. बुधवार को पटना में राहुल गांधी ने हाथ में संविधान की किताब दिखाकर कहा था, ‘RSS और बीजेपी वाले संविधान के सामने माथा टेकते हैं और पीछे इसे खत्म करने की साजिश कर रहे हैं. मैं चाहता हूं कि दलित समुदाय के लोग लीडरशिप में आएं. देश के टॉप-10 कंपनियों के मालिक में दलित भी हो.मोदी ने दलितों-पिछड़ों की जेब से पैसा निकालकर 25 लोगों का 16 लाख करोड़ रुपया माफ किया, इस लिस्ट में एक भी दलित नहीं है. मीडिया में दलितों की भागीदारी नहीं है.

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