सिटी पोस्ट लाइव : बिहार विधान सभा चुनाव को लेकर में RSS के स्वयंसेवक बिहार में बेहद सक्रीय हैं. पटना, मुजफ्फरपुर, सीवान, भागलपुर सहित सीमांचल और मगध के गांव-शहरों में दिनरात काम कर रहे हैं.बिहार में कुल 16 हजार स्वयंसेवक, 2 महीने से एक्टिव हैं.बिहार में अभी 16 हजार स्वयंसेवक इस वक्त एक्टिव हैं. RSS के कार्यकर्ता भले दिखाई नहीं दें लेकिन उनके काम का नतीजा दिखाई देने लगा है. बिहार में भी महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली जिताने वाले मॉडल पर RSS काम कर रहा है. ‘स्वयंसेवक घर-घर पहुंच रहे हैं. लोगों का मन टटोल रहे हैं.. चाय की दुकानों, मंदिरों और घरों में जाकर लोगों से मिल रहे हैं.
हर गांव में 10 से 15 स्वयंसेवक काम कर रहे हैं, ये अलग-अलग गांवों में जा रहे हैं.RSS के स्वयंसेवक की एक टीम घर-घर जाकर वोटर्स की लिस्ट तैयार कर चुकी हैं. अब दूसरी टीम ने अपना काम शुरू किया है. ये टीमें उन वोटर्स को मना रही हैं, जिसके मन में BJP या NDA के लिए थोड़ी भी दुविधा है. ‘घर-घर जाकर लोगों की कैटेगरी के हिसाब से लिस्ट बनाने का काम लगभग पूरा हो चुका है. RSS की दूसरी टीमों ने लिस्ट के मुताबिक लोगों से फिर संपर्क करना शुरू किया है. ये टीमें वोटर्स को मुद्दे, उनके फायदे-नुकसान के बारे में बताएंगी.’किस पार्टी ने क्या वादा किया था, कितना पूरा किया, किस पार्टी ने बिहार को जंगलराज बनाया और किसने अच्छा काम किया. इन टीमों का काम कन्फ्यूज वोटर्स के दिमाग में क्लेरिटी लाना है.
इस टीम का काम ही वोटर्स का गुस्सा झेलना है, जैसे परिवार के नाराज सदस्य की शिकायत सुनी जाती है. शिकायतों की लिस्ट भी तैयार की जा रही है. ये लिस्ट टीम अपनी लीडरशिप को दे रही हैं.‘इस लिस्ट पर गंभीरता से विचार हो रहा है. इसे दो हिस्से में बांटा है. जो काम दो महीनों के अंदर हो सकते हैं, उन्हें करवाने की कोशिश हो रही है. जिन शिकायतों को दूर करने में ज्यादा वक्त लगना है, उसके लिए भरोसा दे रहे हैं, उनकी शिकायत चुनाव के फौरन बाद दूर की जाएगी.’किस तरह की शिकायतें हैं, जिन पर तुरंत काम करवा रहे हैं? जवाब मिला, ‘जैसे किसी गांव में सड़क खराब है, उसे ठीक करवा देना या फिर पक्की सड़क बनवा देना. किसी को PM आवास योजना के तहत घर नहीं मिला, तो उसकी प्रोसेस शुरू करवा देना, राशन कार्ड बनवा देना.
‘बिहार में महिला वोटर के लिए अलग से रणनीति बनाई है. RSS से जुड़े महिला संगठन ये काम कर रहे हैं. उनकी टीमें अलग-अलग उम्र की महिलाओं से मिल रही हैं. घरेलू और पेशेवर महिलाओं के लिए अलग टीमें हैं.’ ‘RSS एक सर्वे भी कर चुका है. कैटेगरी के साथ महिलाओं की लिस्ट तैयार है. अब उनके साथ टीमें बैठक कर रही हैं. महिलाओं से पूछा जा रहा है कि उनकी सीट पर कौन सा नेता बेहतर है। उन्हें कैसे नेता और सरकार चाहिए.‘महिलाएं घर से लेकर बाहर तक हर चीज से प्रभावित होती हैं. घर का राशन, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, सड़कों का माहौल, इनसे जुड़े ऐसे कुछ सवाल महिलाओं से पूछे जा रहे हैं. फिर उनके जवाब पर डिस्कशन किया जा रहा है.
RSS 100 सीटों पर कैंडिडेट की लिस्ट तैयार कर रहा है. इस पर पार्टी और RSS मंथन करने के बाद फैसला लेगा.’ हर सीट पर तीन कैंडिडेट के नाम देंगे. हर कैंडिडेट की छवि, मजबूत और कमजोर पक्ष डिटेल में देंगे. जिस सीट पर मौजूदा विधायक कमजोर हैं, वहां नए चेहरे की तलाश करेंगे. विधायक का रिपोर्ट कार्ड भी देंगे.’प्रधानमंत्री की रैली से लेकर स्टार प्रचारकों की रैलियों में RSS की भूमिका होगी. कौन सा प्रचारक कहां वोटर्स को अपील करेगा, इसे ध्यान में रखते हुए RSS रैलियों और बैठकों का प्लान बना रहा है.
‘RSS के लोग रोज 5-10 घरों में जाते हैं. लोगों से राम मंदिर, विकास की योजनाएं, जातिवाद के खिलाफ और RSS की रणनीति पर बात करते हैं. हर गांव में 10 से 15 स्वयंसेवकों की टीम डोर-टु-डोर कैंपेन करती है.” राष्ट्रवाद, सीमा सुरक्षा, पाकिस्तान, हिंदुत्व, राम मंदिर, गौ-रक्षा और विकास के साथ-साथ PM किसान सम्मान निधि योजना, आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के फायदे बताते हैं. ऐसे परिवार चुनते है जो हिंदू हैं, लेकिन BJP के वोटर नहीं हैं. या BJP के वोटर रहे हैं, लेकिन किसी वजह से नाराज हैं. अभी एक ब्लॉक में हर हफ्ते 100 बैठकें कर रहे हैं.’