सिटी पोस्ट लाइव : कांग्रेस बिहार में महागठबंधन के साथ चुनाव लडेगी या फिर दिल्ली की तरह अकेले मैदान में उतरेगी इसको लेकर पिछले कुछ दिनों से चले आ रहे सस्पेंस पर मंगलवार को ब्रेक कांग्रेस ने खुद लगा दिया है. दिल्ली में अपने बिहार के तमाम बड़े नेताओं के साथ बैठक में कांग्रेस पार्टी ने इस साल अक्टूबर में होने वाला विधानसभा चुनाव अपनी सहयोगी आरजेडी के साथ लड़ने का ऐलान कर दिया है..
गौरतलब है कि पिछले दो महीने से बिहार में कांग्रेस काफी सक्रीय नजर आ रही है.उसने दो नये उप-प्रभारी नियुक्त करने के साथ साथ न्य चुनाव प्रभारी बना दिया है.प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर अपनी पार्टी के नेता राजेश कुमार राम को बिठा दिया है.इतना ही नहीं कांग्रेस ने कन्हैया जैसे नेता को बिहार में आगे कर दिया है जिसे लालू यादव देखना नहीं चाहते.कांग्रेस ने इतना दबाव बना दिया कि आखिरकार आरजेडी को सरेंडर करना पड़ा. बिहार के नेताओं के साथ मंगलवार को कांग्रेस आलाकमान के साथ एक अहम बैठक की, जिसमें यह निर्णय लिया गया कि कांग्रेस अपनी सहयोगी आरजेडी के साथ मिलकर ही विधानसभा चुनाव लड़ेगी. 7 अप्रैल को राहुल गांधी एक बात फिर बिहार के दौरे पर जाएंगे.
सबसे बड़ी बात ये है कि महागठबंधन तेजस्वी यादव को cm का चेहरा बनाकर चुनाव नहीं लडेगा.कांग्रेस पार्टी के प्रभारी कृष्णा अल्लावारु ने कहा कि चुनाव लड़ने के बाद मिल बैठकर तय करेगें कि कौन मुख्यमंत्री बनेगा.अभी प्राथमिकता किसी तरह से चुनाव जितने की है.कांग्रेस के इस बयान पर अभीतक आरजेडी की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.अगर आरजेडी तेजस्वी यादव को सीएम उम्मीदवार घोषित किये वगैर चुनाव लडती है तो इसका मतलब साफ़ है कि कांग्रेस पार्टी ने आरजेडी को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया है.अगर वाकई आरजेडी कांग्रेस के नेत्रित्व में बिहार में बिना मुख्यमंत्री घोषित किये चुनाव लडती है तो NDA की मुश्किल बढ़ जायेगी.NDA से नाराज और वैसे NDA वोटर जो किसी कीमत पर आगे नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नहीं देखना चाहते, कांग्रेस का साथ दे सकते हैं.