सिटी पोस्ट लाइव : बिहार विधानसभा चुनाव में सीटों को लेकर गठबंधनों और दलों के बीच सीटों को लेकर रणनीति बनने लगी है. गठबंधनों में शामिल दलों के बीच भी अधिक से अधिक विधानसभा सीट पाने को लेकर प्रेशर पॉलिटिक्स जारी है.दो केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान व जीतनराम मांझी और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा के बीच चल रही सियासी बयानबाजी में दिखने लगी है.एक ओर हम पार्टी के संरक्षक केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी व लोजपा आर के राष्ट्रीय अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान पर लगातार हमलावर हैं. अब रालोमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा की भी इसमें एंट्री हो गयी है.
बिहार में लॉ एंड ऑर्डर को लेकर चिराग पासवान के बयान पर उपेंद्र कुशवाहा ने भी चिराग पासवान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि ये तीनों पार्टियां भाजपा के कोटे में हैं. मतलब, भाजपा को ही इन तीनों पार्टियों को साधने की जिम्मेवारी है. इन तीनों पार्टियों को कितनी सीटें मिलेंगी, ये बीजेपी ही तय करेगी. ऐसे में बीजेपी को अपनी सीटों में ही इन पार्टियों को सीटें देने की नौबत आ सकती है. अगर ऐसा होता है तो, इन तीनों पार्टियों को सीटें उनके मुताबिक मिलना आसान नहीं होगा. राजनीतिक जानकारों का कहना है कि तीनों की सियासी बयानबाजी के पीछे अधिक से अधिक सीटें पाने की कवायद है.
लोकसभा चुनाव से ही जीतनराम मांझी और चिराग पासवान में ठनी है. गया लोकसभा चुनाव में जीतनराम मांझी हम पार्टी से एनडीए के उम्मीदवार थे. जीतनराम मांझी के चुनाव प्रचार में चिराग पासवान नहीं गये थे. उपचुनाव में भी इमामगंज में जाने से इन्कार कर दिया था. मांझी और चिराग पासवान के बीच दलित नेता होने की जंग तब से ही शुरू है. एक मांझी और दूसरे पासवान जाति से आते हैं. मांझी का दावा है कि वे बिहार की सबसे बड़ी दलित आबादी का प्रतिनिधत्व करते हैं. चिराग का भी दावा रहता है कि पासवान का सौ फीसदी वोट वे ट्रांसफर कराने की क्षमता रखते हैं. इसके साथ ही दलितों का प्रतिनिधित्व भी करते हैं. अपने-अपने दावों के बीच उनमें एक दूसरे से बड़ा दलित नेता होने की जंग चल रही है.
लोकसभा में चिराग पासवान को पांच सीटें मिलीं. जीतनराम मांझी व उपेंद्र कुशवाहा को एक-एक सीट दी गयी. इसमें उपेंद्र कुशवाहा की हार हुई. लोकसभा चुनाव में भी इन दोनों दलों की अपेक्षा चिराग पासवान को एनडीए में ज्यादा तरजीह मिली. विधानसभा चुनाव में भी इन दोनों दलों की अपेक्षा चिराग पासवान को अधिक सीटें मिलने की संभावना है. ऐसे में जीतनराम मांझी की पार्टी हम और उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोमो को काफी कम सीटों पर संतोष करना पड़ेगा. इस कारण मांझी और उपेंद्र कुशवाहा ने चिराग को निशाने पर लिया है.