77वाँ गणतंत्र दिवस: पहली बार किसी देश के राष्ट्रपति नहीं, यूरोपीय संघ के दो बड़े नेता होंगे मुख्य अतिथि…

Ritu Raj

भारत के 77वें गणतंत्र दिवस (26 जनवरी 2026) पर इस बार यूरोपीय संघ (EU) के दो शीर्ष नेताओं – यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो लुइस सैंटोस दा कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन – को संयुक्त रूप से मुख्य अतिथि (Chief Guests) बनाया गया है। यह भारत के इतिहास में पहली बार है जब किसी एक देश के बजाय एक अंतरराष्ट्रीय संगठन (EU) के दो सबसे उच्च पदाधिकारियों को एक साथ यह सम्मान दिया गया है। यह कदम भारत-EU के बीच गहरी होती रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक है, खासकर जब वैश्विक स्तर पर अमेरिका-यूरोप संबंधों में तनाव और सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन की जरूरत बढ़ रही है।

दौरे का आधिकारिक कार्यक्रम (Schedule);
यह तीन दिवसीय राजकीय दौरा (State Visit) है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि विदेश मंत्रालय (MEA) ने 15 जनवरी 2026 को की।
25 जनवरी: दोनों नेता भारत पहुंचेंगे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से शिष्टाचार मुलाकात करेंगे।
26 जनवरी: गणतंत्र दिवस परेड में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। वे कर्तव्य पथ पर परेड देखेंगे, जहां थीम “वंदे मातरम” है और भारत की सैन्य शक्ति व सांस्कृतिक विविधता प्रदर्शित होगी।
27 जनवरी: 16वां भारत-EU शिखर सम्मेलन (India-EU Summit) की सह-अध्यक्षता करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ प्रतिनिधिमंडल स्तर की बातचीत होगी। इसके अलावा, भारत-EU बिजनेस फोरम भी आयोजित होगा, जहां व्यापारिक नेता और नीति-निर्माता भाग लेंगे।

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दौरे से संभावित परिणाम और उपलब्धियां;
1) भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बड़ा ब्रेकथ्रू — वार्ताएं 2007 से चल रही हैं। दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में तेज प्रगति हुई है। अब तक 24 में से 20 अध्याय पूर्ण हो चुके हैं, और शेष मुद्दों पर दैनिक बातचीत जारी है। कई रिपोर्ट्स में संकेत है कि 27 जनवरी को FTA को अंतिम रूप देने या घोषित करने की संभावना मजबूत है। इससे भारतीय निर्यात (टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो आदि) को बड़ा बढ़ावा मिलेगा, और EU को चीन पर निर्भरता कम करने का विकल्प।
2) रक्षा और सुरक्षा सहयोग का औपचारिक ऐलान — यूरोपीय नौसेना की टुकड़ी पहली बार परेड में शामिल होगी, जो रक्षा साझेदारी का संकेत है।
ग्रीन एनर्जी, हाइड्रोजन और क्लीन टेक्नोलॉजी में गहरा सहयोग — क्लाइमेट एक्शन और रिन्यूएबल एनर्जी पर फोकस बढ़ेगा।
3) सप्लाई चेन डाइवर्सिफिकेशन में भारत की भूमिका मजबूत — EU भारत को वैकल्पिक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में देख रहा है।
वैश्विक नियम-आधारित व्यवस्था की संयुक्त पैरवी — दोनों पक्ष रूस-यूक्रेन, इंडो-पैसिफिक और बहुपक्षीय मुद्दों पर सहयोग बढ़ा सकते हैं।

गौरतलब है कि यह दौरा भारत की “मल्टी-एलाइनमेंट” नीति को दर्शाता है, जहां वह अमेरिका, रूस और यूरोप के साथ संतुलन बनाए रखते हुए अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता को मजबूत कर रहा है। कुल मिलाकर, यह न केवल ऐतिहासिक, बल्कि आर्थिक और भू-राजनीतिक रूप से गेम-चेंजर साबित हो सकता है।

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