बिहार के राजनैतिक गलियारे में आज एक नया अध्याय जुड़ा, जब लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन ने राज्य के 43वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली। पटना स्थित ‘लोक भवन’ में आयोजित एक गरिमामयी समारोह के दौरान पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के. विनोद चंद्रन ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
सैयद अता हसनैन का व्यक्तित्व सैन्य कौशल और रणनीतिक सूझबूझ का संगम है। उन्होंने लगभग 40 वर्षों तक भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दीं। वे विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर में अपने रणनीतिक नेतृत्व और शांति प्रयासों के लिए पहचाने जाते हैं। कश्मीर में तैनाती के दौरान उन्होंने युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए शिक्षा, खेल और रोजगार से जुड़ी कई महत्वपूर्ण योजनाएं शुरू की थीं। सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद भी वे देश की सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में सक्रिय रहे। वे राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सदस्य के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं।

हालांकि, इनसे ठीक पहले 25 दिसंबर 2024 को आरिफ मोहम्मद खान को बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। ए.आर. किदवई (1998) के बाद, आरिफ मोहम्मद खान के रूप में बिहार को 26 साल बाद कोई मुस्लिम राज्यपाल मिला था। अब सैयद अता हसनैन की नियुक्ति के साथ यह गौरवपूर्ण क्रम जारी है।