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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान सारण में आयोजित जनसभा में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के एक बयान ने नई बहस छेड़ दी है। सम्राट चौधरी ने दावा किया कि बिहार के गांवों और गलियों में सड़कों का जाल इतना विस्तृत है कि इसकी तुलना उत्तर प्रदेश, बंगाल, झारखंड या नेपाल से भी नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि बिहार का सड़क नेटवर्क इन सभी पड़ोसी राज्यों और देशों से कहीं अधिक बेहतर और लंबा है।
सम्राट चौधरी का दावा: ‘पड़ोसियों से बहुत आगे है बिहार’
जनसभा को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शिता के कारण आज बिहार के एक-एक गांव तक बारहमासी सड़कें पहुंच चुकी हैं। उन्होंने कहा, “आप उत्तर प्रदेश, झारखंड, बंगाल या नेपाल चले जाइए, जितनी सड़कें बिहार की गलियों में हैं, उतनी किसी राज्य में नहीं मिलेंगी।” साथ ही उन्होंने बिजली और विकास के अन्य पैमानों पर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं।
क्या कहते हैं आंकड़े? हकीकत का विश्लेषण
सम्राट चौधरी के दावे ‘अतिशयोक्ति’ नजर आते हैं जब हम आधिकारिक आंकड़ों पर गौर करते हैं। विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के साथ तुलना करने पर बिहार काफी पीछे नजर आता है:
उत्तर प्रदेश vs बिहार: उत्तर प्रदेश में सड़कों का कुल नेटवर्क लगभग 18.37 लाख किलोमीटर है, जबकि बिहार में यह आंकड़ा करीब 2.98 लाख किलोमीटर (2019 के आंकड़ों के अनुसार) है। यानी यूपी में बिहार से करीब छह गुना अधिक सड़कें हैं।
राष्ट्रीय औसत: बिहार प्रति लाख आबादी पर नेशनल हाईवे (NH) की उपलब्धता के मामले में राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है। जहाँ राष्ट्रीय औसत 10.90 किमी है, वहीं बिहार में यह मात्र 4.54 किमी है।
सड़कों की चौड़ाई: बिहार के पथ निर्माण विभाग के अनुसार, राज्य की 26,791 किमी शहरी सड़कों में से केवल 7 प्रतिशत सड़कें ही चार लेन या उससे अधिक चौड़ी हैं।
सकारात्मक पक्ष: बिहार में हुआ है सुधार
हालांकि, पिछले 20 वर्षों में बिहार के सड़क नेटवर्क में काफी सुधार हुआ है। 2005 में नेशनल हाईवे की लंबाई मात्र 3600 किमी थी, जो अब बढ़कर 6389 किमी हो गई है। बिहार सरकार ‘मुख्यमंत्री ग्राम सम्पर्क योजना’ और ‘टोला सम्पर्क निश्चय योजना’ के तहत युद्ध स्तर पर काम कर रही है। वित्तीय वर्ष 2025-26 तक हजारों किलोमीटर नई ग्रामीण सड़कों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।
तुलनात्मक रूप से बिहार, झारखंड और नेपाल जैसे क्षेत्रों से बेहतर स्थिति में हो सकता है, लेकिन उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों और राष्ट्रीय औसत के मुकाबले अभी एक लंबी दूरी तय करनी बाकी है। सरकार का ध्यान अब सड़कों के ‘सुदृढ़ीकरण’ और उन्हें ‘चार लेन’ में बदलने पर है ताकि बिहार वास्तविक रूप से एक ‘सुपर रोड नेटवर्क’ वाला राज्य बन सके।