RJD की हार के बाद लालू परिवार में महाभारत! तेजस्वी के संजय पर ‘शकुनि’ की छाया…

Ritu Raj

बिहार चुनाव में करारी हार के बाद आरजेडी के भीतर घमासान खुलकर सामने आ गया है। लालू परिवार में ‘महाभारत’ की शुरुआत तब हुई जब रोहिणी आचार्य ने सार्वजनिक रूप से अपने भाई तेजस्वी यादव से दूरी बना ली और उनके बेहद करीबी व सलाहकार संजय यादव पर गंभीर आरोप जड़ दिए। संजय यादव पहले भी विवादों के केंद्र में रहे हैं। तेज प्रताप उन्हें ‘जयचंद’ तक कह चुके हैं। अब चुनावी हार के बाद फिर वही नाम लालू परिवार की रार की वजह बन गया है।

रोहिणी आचार्य ने राजनीति छोड़ने की घोषणा करते हुए संजय यादव और रमीज पर परिवार में विवाद बढ़ाने का आरोप लगाया है। रोहिणी का दावा है कि उन्हें राजनीति और परिवार दोनों से दूरी बनाने के लिए इन्हीं दो लोगों ने मजबूर किया। उनके इस बयान ने बिहार की राजनीति और आरजेडी के भीतर नई हलचल पैदा कर दी है। संजय यादव को लेकर लालू परिवार की नाराजगी पहले से ही सामने आती रही है, लेकिन लगातार विवादों के बावजूद उन पर कोई कार्रवाई न होने से सवाल और गहरे हो गए हैं। तेजस्वी यादव की एक यात्रा के दौरान भी विवाद तब भड़का था, जब वायरल तस्वीर में संजय यादव फ्रंट सीट पर बैठे दिखे थे। इस पर रोहिणी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा था कि फ्रंट सीट बड़े नेता के लिए होती है और गैर-मौजूदगी में कोई और उस जगह पर न बैठे। रोहिणी ने इशारों में कहा था कि अगर कोई खुद को नेता समझने लगे तो यह अलग बात है। संजय यादव मूल रूप से हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के नंगल सिरोही गांव के रहने वाले हैं। चुनावी हलफनामे में दर्ज जानकारी के मुताबिक, वे कंप्यूटर साइंस में पोस्टग्रेजुएट हैं और करीब 2.18 करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक हैं। तेजस्वी यादव और संजय की पहली मुलाकात 2012 के आसपास दिल्ली के एक क्रिकेट ग्राउंड में हुई थी। दोनों की दोस्ती वहीं से शुरू हुई। 2013 में जब लालू प्रसाद यादव चारा घोटाले के मामले में जेल गए, तो तेजस्वी राजनीतिक प्रशिक्षण के लिए पटना लौट आए। इसी दौरान उन्होंने अपने भरोसेमंद दोस्त संजय यादव को भी पटना बुलाया। संजय ने तेजस्वी का साथ देने के लिए एक मल्टीनेशनल IT कंपनी की अच्छी-खासी नौकरी छोड़ दी।

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संजय यादव पर लगातार लगते आरोपों और रोहिणी आचार्य के ताजा हमले के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर टिक गई हैं कि क्या आरजेडी नेतृत्व आखिरकार कोई कदम उठाएगा या हालात यूं ही अनिश्चित बने रहेंगे। पार्टी के भीतर उनके प्रभाव, रणनीतियों में दखल और पारिवारिक मामलों में बढ़ती भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब अभी तक स्पष्ट नहीं है। अब रोहिणी के इन गंभीर आरोपों ने दबाव को और बढ़ा दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि लालू परिवार और आरजेडी इस विवाद पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं और संजय यादव का राजनीतिक भविष्य किस दिशा में जाता है।

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