सिटी पोस्ट लाइव
बिहार में विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा से ठीक पहले, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक और बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ के तहत प्रदेश की 25 लाख महिलाओं के बैंक खातों में 10-10 हजार रुपये की धनराशि सीधे ट्रांसफर की है। राजनीतिक गलियारों में इस कदम को विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए सरकार का ‘मास्टर स्ट्रोक’ माना जा रहा है, जिसका सीधा असर महिला वोट बैंक पर पड़ सकता है।
माना जा रहा है कि राज्य में इसी सप्ताह विधानसभा चुनाव की तारीखें घोषित कर दी जाएंगी, जिसके बाद आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी। ऐसे में, चुनाव की घोषणा से ऐन पहले यह आर्थिक सहायता महिलाओं के लिए बड़ा तोहफा है। खास बात यह है कि यह धनराशि महिलाओं को लौटानी नहीं है। यह योजना अगस्त में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा हर घर की एक महिला को स्वरोजगार शुरू करने के लिए 10,000 रुपये देने की घोषणा के बाद सितंबर से लागू की गई थी।
दूसरी बार ट्रांसफर की गई राशि
मुख्यमंत्री आवास में आयोजित एक कार्यक्रम में इस योजना की राशि सीधे लाभार्थियों के खाते में भेजी गई। इस दौरान बिहार सरकार के दोनों उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा के साथ जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी और ग्रामीण विकास विभाग के मंत्री श्रवण कुमार भी मौजूद रहे। यह दूसरा मौका है जब योजना की राशि सीधे ट्रांसफर की गई है। इससे पहले, 26 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की मौजूदगी में 75 लाख महिलाओं को 7500 करोड़ रुपये की पहली किश्त भेजी गई थी।
एनडीए के लिए ‘मास्टर स्ट्रोक’
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना’ विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए सरकार का सबसे बड़ा दांव साबित हो सकता है। यह योजना न केवल महिलाओं को आर्थिक संबल प्रदान करेगी, बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों ही स्तरों पर एनडीए के वोट बैंक को मजबूत करने का काम भी करेगी। बिहार की राजनीति में महिला मतदाताओं की भागीदारी हमेशा से ही निर्णायक रही है और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार महिला सशक्तिकरण को हमेशा से ही अपनी प्रमुख नीति का हिस्सा मानते रहे हैं। राज्य की महिलाएं बीते चुनावों में भी बढ़-चढ़कर मतदान करती रही हैं, जिससे यह कदम राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
इस योजना के तहत, रोजगार शुरू करने के बाद आवश्यकतानुसार महिलाओं को 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त वित्तीय सहायता भी प्रदान किए जाने का प्रावधान है।