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2014 से 2020 तक की बिहार की राजनीति का लेखाजोखा.

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सिटी पोस्ट लाइव : बीजेपी के खिलाफ 20 24 के लोक सभा चुनाव में देश के विपक्षी दलों को एकजुट करने में जुटे बिहार के सीएम नीतीश कुमार भले कामयाब  होते हुए दिख रहे हैं लेकिन बिहार महागठबंधन में एकजुटता बनाए रखना उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती है.पटना में विपक्षी एकता की बैठक 23 जून को होनी है लेकिन उस बैठक से पहले ही बिहार में लोकसभा की सीटों पर घमासान मचने के आसार हैं.कभी नीतीश कुमार के साथ रहने की कसमें खाने वाले हम सुप्रीमो जीतन राम मांझी के बयान से लगातार इसके संकेत मिल रहे हैं.

 

पहले उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस बार 5 सीटों पर लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. इसके बाद अब उन्होंने ये बयान देकर राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया है कि विपक्षी एकता की बैठक में उन्हें न्योता नहीं मिला है. दूसरी तरफ सरकार की दूसरी सहयोगी लेफ्ट भी 5 से ज्यादा लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है.बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं। यहां अभी महागठबंधन में 7 दल शामिल हैं. लेफ्ट की दो पार्टियों को छोड़ दें तो 5 पार्टियां लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. आरजेडी, जेडीयू और कांग्रेस तीनों बड़ी पार्टियां हैं. 2019 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू जहां 17 सीटों पर चुनाव लड़ी थी जबकि आरजेडी 19 सीटों पर लड़ी और कांग्रेस 9 सीटों पर.

 

इस बार किसी भी सूरत में किसी भी दल को इतनी सीटें नहीं मिल पायेगीं. ये तय है कि नीतीश कुमार को विनिंग सीट से समझौता करना पड़ेगा या तेजस्वी यादव बड़ी लड़ाई के लिए त्याग कर नीतीश कुमार को आगे बढ़ाएंगे.  महागठबंधन में जेडीयू के पास सबसे ज्यादा 16 सीटें हैं. कांग्रेस के पास एक सीट है.नीतीश कुमार विपक्षी एकता के चेहरा भी हैं. ऐसे में बिहार के सभी दल आपस में समझौता कर जेडीयू को सबसे ज्यादा सीट देकर बाकी बची सीटों में आपस में चुपचाप बंटवारा कर लेगें इसकी संभावना  कम हैं.

 

 पिछले चुनाव में किस दल ने सबसे ज्यादा बीजेपी को चैलेंज दिया था और नंबर-2 पर रहें.अगर ये आधार बना तो  नीतीश कुमार को समझौता करना पड़ेगा.अगर सीटों के बटवारे का आधार   विधानसभा सीटों को बनाया जाएगा तो  एक लोकसभा क्षेत्र में 6 सीट होता है.ऐसे में जेडीयू और आरजेडी के बीच भी घमाशान होगा. इस लिहाज से  आरजेडी के कोटे में 14 और जेडीयू के कोटे में 8 सीटें बनती हैं. ज्यादा से ज्यादा जेडीयू और आरजेडी के बीच 12-12 सीटों का बटवारा हो सकता है.

 

भाकपा माले के राज्य सचिव कुणाल कहते हैं कि पिछली बार हम महागठबंधन का हिस्सा नहीं थे. राजद के साथ हमारा एक सीटों पर प्रतीकात्मक तालमेल था. आरा की सीट उन्होंने हमारे लिए छोड़ी थी और हमने उनके लिए पाटलिपुत्र की सीट छोड़ी थी.हम लोग चार सीटों पर चुनाव लड़े थे. सीवान, आरा, काराकाट और जहानाबाद. स्वाभाविक है कि कोई भी चाहेगा कि ज्यादा सीट हमको मिले. अभी तक सीटों को लेकर महागठबंधन के भीतर कोई बातचीत नहीं हुई है.

 

2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 30 सीटों पर चुनाव लड़ी थी. इसमें 22 सीट जीतने में सफल रही थी. जबकि तब एनडीए में शामिल लोजपा 7 में 6 और रालोसपा 3 में 3 जीतने में कामयाब रही थी. यानी NDA 40 में 31 सीट जीतने में कामयाब रही थी. उस दौरान सबसे ज्यादा 38 सीटों पर जेडीयू ने चुनाव लड़ा था.इसमें मात्र दो सीट पर ही जीत मिली थी. कांग्रेस 12 सीटों पर चुनाव लड़ी थी और  उसे मात्र 2 सीटों पर जीत मिली थी. जबकि 27 सीटों पर चुनाव लड़ने वाले राजद को मात्र 4 सीटों पर ही जीत हासिल हुई थी.

2019 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर जेडीयू एनडीए में शामिल हो गया था. जेडीयू और बीजेपी ने साथ चुनाव लड़ा था. लोजपा भी इसका हिस्सा थी. भाजपा और जेडीयू 17-17 सीटों पर चुनाव लड़ी थी.इसमें बीजेपी 100 पर्सेंट 17 सीटें जीतने में कामयाब रही थी. जबकी जेडीयू 16 सीट जीतने में कामयाब रही. वहीं, लोजपा भी अपने सभी 6 उम्मीदवारों को जीतानें में कामयाब रही थी..महागठबंधन की तो तब बिहार में महागठबंधन में 6 पार्टियां शामिल थीं. इसमें राजद ने 19 सीटों पर चुनाव लड़ा था. इनमें कांग्रेस-9, हम-3, वीआईपी-3 और रालोसपा-5 सीटों पर चुनाव लड़ी थी. कांग्रेस के एक सीट छोड़कर सभी किसी भी दल का चुनाव में खाता तक नहीं खुला था.

 

बात करें विधानसभा चुनाव की तो जिसके साथ नीतीश रहे विधानसभा में वही दल बहुमत में रही. 2015 के विधानसभा चुनाव में 20 साल के बाद पहली बार पहली बार नीतीश बीजेपी से अलग होकर आरजेडी से हाथ मिलाए थे.कांग्रेस भी महागबंधन का हिस्सा थी. महागठबंधन 178 सीटों पर कब्जा जमाने में कामयाब रही थी.पार्टियों के प्रदर्शन की बात करें तो इस चुनाव में आरजेडी 101 सीटों पर चुनाव लड़ा था. इसमें 71 सीटें जीतने में पार्टी कामयाब रही थी. वहीं जेडीयू 101 सीटों पर चुनाव लड़ी थी इसमें पार्टी को 80 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. जबकि कांग्रेस 41 में से 27 सीटें जीतने में कामयब रही थी. बीजेपी को 53 सीटों पर ,एलजेपी को 2 और  हम को एक सीट और रालोसपा को 2 सीट जीतने में कामयाबी मिली थी.

 

 2020 के विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार का गठबंधन एक बार फिर से बीजेपी के साथ हो गया था. उनके साथ हम और मुकेश सहनी की वीआईपी भी एनडीए का हिस्सा थी. बीजेपी 110 सीटों पर चुनाव लड़कर 74 सीटें जीती थी. वहीं जेडीयू 115 सीटों पर चुनाव लड़ीं थी इसमें 43 सीटें जीतने में ही कामयाब हुई थी. वहीं वीआईपी 11 में 4 और हम 7 में 4 जीतने में सफल रही थी. इस चुनाव में पहली तेजस्वी यादव ने टिकट बंटवारे से लेकर सीटों के चयन तक का निर्णय लिए थे. ये पहला चुनाव था जब लालू यादव पूरी चुनाव प्रक्रिया से दूर थे. ऐसे में राजद 144 सीटों पर चुनाव लड़ी और 75 सीटें जीतने में कामयाब हुई थी। विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी भी बनी थी, जबकि कांग्रेस 70 में 19, भाकपा(माले) 19 में 12, सीपाआई 6 में 2 और भाकपा(एम) 4 में से 2 सीटें जीतने सफल रही थी।

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