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आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के लोगों के लिए प्रमाण पत्र बनवाना अब पहले से आसान और पारदर्शी होगा। बिहार राज्य उच्च जाति विकास आयोग ने ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र आवेदनों की मनमानी अस्वीकृति (Rejection) पर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग के अध्यक्ष डॉ. महाचंद्र प्रसाद सिंह ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अब कोई भी अंचल अधिकारी बिना ठोस और लिखित कारण बताए किसी भी आवेदन को खारिज नहीं कर सकेगा।
रिजेक्शन का देना होगा लिखित कारण
बुधवार को मुजफ्फरपुर समाहरणालय में आयोजित समीक्षा बैठक में डॉ. महाचंद्र प्रसाद सिंह ने अधिकारियों की कार्यशैली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि आयोग को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि पात्र उम्मीदवारों के आवेदन छोटे-मोटे या अस्पष्ट कारणों से रद्द कर दिए जाते हैं। अब नियम यह होगा कि यदि कोई आवेदन रिजेक्ट किया जाता है, तो उसका ठोस लिखित कारण आवेदक को बताना अनिवार्य होगा, ताकि वह उसमें सुधार कर सके या अपील कर सके।
48 खारिज आवेदनों की फिर से होगी जांच
समीक्षा के दौरान पता चला कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले में अब तक 6270 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 48 को अंचल स्तर पर अस्वीकृत कर दिया गया। अध्यक्ष ने इन सभी 48 खारिज फाइलों को दोबारा खोलने और उनकी गहन जांच करने का आदेश दिया है। साथ ही, तिरहुत प्रमंडल के आयुक्त को निर्देश दिया गया है कि वे एक माह के भीतर प्रमंडल के सभी अंचलों से स्वीकृत, अस्वीकृत और लंबित आवेदनों की पूरी सूची आयोग को सौंपें।
वैधता 3 साल करने और उम्र सीमा बढ़ाने का प्रस्ताव
बैठक में ईडब्ल्यूएस वर्ग के हित में कई क्रांतिकारी सुझाव भी सामने आए, जिन्हें आयोग ने सरकार को भेजने का भरोसा दिया है:
• वैधता में विस्तार: ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र की वैधता को वर्तमान 1 वर्ष से बढ़ाकर 3 वर्ष करने का प्रस्ताव।
• उम्र सीमा में छूट: प्रतियोगी परीक्षाओं में ईडब्ल्यूएस पुरुषों के लिए अधिकतम उम्र 40 वर्ष और महिलाओं के लिए 45 वर्ष करने की मांग।
• शिक्षा में आरक्षण: निजी स्कूलों (RTE के तहत) और केंद्रीय/नवोदय विद्यालयों में ईडब्ल्यूएस बच्चों के लिए सीटें आरक्षित करने का सुझाव।
भ्रष्टाचार और देरी पर लगेगा अंकुश
आयोग के उपाध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि ईडब्ल्यूएस आरक्षण का लाभ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े गरीब सवर्णों तक पहुँचाना प्राथमिकता है। प्रमाण पत्र के मापदंडों को सरल बनाने और प्रक्रिया को डिजिटल रूप से और अधिक पारदर्शी बनाने पर जोर दिया गया है। इस फैसले से उन छात्रों और युवाओं को बड़ी राहत मिलेगी जो एन वक्त पर प्रमाण पत्र रिजेक्ट होने के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं या दाखिले से वंचित रह जाते थे।