तेजस्वी यादव के ‘दामादवाद’ आरोप पर अशोक चौधरी का पलटवार लालू परिवार पर किया करारा हमला

Deepak Sharma

लालू परिवार बताए, परिवारवाद की शुरुआत कहां से हुई? — अशोक चौधरी

सिटी पोस्ट लाइव
बिहार की राजनीति में इन दिनों ‘दामादवाद’ को लेकर तीखी बहस छिड़ी है। विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव द्वारा लगाए गए आरोपों पर ग्रामीण कार्य मंत्री डॉ. अशोक चौधरी ने सोमवार को जोरदार जवाब दिया। उन्होंने साफ किया कि सायन कुणाल को बिहार राज्य धार्मिक न्याय पर्षद का सदस्य उनके दामाद होने के कारण नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) कोटे से मनोनीत किया गया है।

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तेजस्वी यादव ने हाल ही में आरोप लगाया था कि राज्य सरकार खास पदों पर “दामादों” को तरजीह दे रही है। इस पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने यहां तक कहा कि “अगर सरकार चाहे तो दामादों के लिए अलग आयोग भी बना दे।” इसी बयान पर जवाब देते हुए मंत्री चौधरी ने कहा, “सायन कुणाल पहले पूर्व आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल के बेटे हैं, फिर मेरे दामाद हैं। उनके परिवार का धार्मिक और सामाजिक कार्यों में बड़ा योगदान रहा है, खासकर महावीर मंदिर और महावीर कैंसर संस्थान के निर्माण में।”

चौधरी ने स्व. रामविलास पासवान के दामाद मृणाल पासवान का भी बचाव किया, जिन्हें हाल ही में अनुसूचित जाति आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने कहा, “मृणाल वर्षों से सक्रिय राजनीतिक कार्यकर्ता हैं, दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। जब तेजस्वी क्रिकेट खेलते थे, तब से मृणाल राजनीति में थे।” हालांकि, जीतनराम मांझी के दामाद देवेंद्र मांझी, जिन्हें आयोग का उपाध्यक्ष बनाया गया है, उनके बारे में चौधरी चुप्पी साध गए।

सबसे तीखा हमला चौधरी ने लालू परिवार पर किया। उन्होंने कहा, “तेजस्वी यादव परिवारवाद पर सवाल कैसे उठा सकते हैं? खुद उनके माता-पिता मुख्यमंत्री रहे हैं। भाई विधायक हैं, बहन सांसद हैं, दूसरी बहन उम्मीदवार थीं। उनके दो मामा भी संसद का हिस्सा रहे हैं। फिर भी उन्हें परिवारवाद नजर नहीं आता।” राजनीतिक गलियारों में अब यह बहस तेज हो गई है कि क्या विपक्ष केवल सत्ता पक्ष पर हमले के लिए ‘दामादवाद’ जैसे शब्द गढ़ रहा है, या वाकई नामों की चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की जरूरत है?

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