सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विधानसभा के शीतकालीन सत्र के पहले दिन की कार्यवाही सोमवार को नव निर्वाचित सदस्यों के शपथ ग्रहण के बाद कल सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई है। हालांकि, सदन में मौजूद सभी सदस्यों ने शपथ ले ली, लेकिन कुछ नवनिर्वाचित सदस्य उपस्थित नहीं हो सके, जिनमें मोकामा के बाहुबली नेता और जनता दल यूनाइटेड (JDU) विधायक अनंत सिंह भी शामिल हैं। फिलहाल बेऊर जेल में बंद अनंत सिंह आज शपथ ग्रहण नहीं कर पाए, जिसके बाद अब सबकी निगाहें कल की कार्यवाही पर टिकी हैं कि ‘छोटे सरकार’ कब और कैसे शपथ लेंगे। प्रो-टेम स्पीकर ने कार्यवाही स्थगित करते हुए घोषणा की कि शेष बचे हुए सदस्यों को मंगलवार को शपथ दिलाई जाएगी।
पैरोल पर आ सकते हैं ‘छोटे सरकार’
मोकामा से विधायक बने अनंत सिंह जिन्हें ‘छोटे सरकार’ भी कहा जाता है वर्तमान में हत्या के एक मामले में न्यायिक हिरासत के तहत पटना की बेऊर जेल में बंद हैं। अब यह माना जा रहा है कि मंगलवार को अनंत सिंह शपथ लेने के लिए पैरोल या अंतरिम जमानत पर जेल से बाहर आ सकते हैं। सूत्रों की मानें तो उन्हें अगले 4 दिनों के लिए सदन की कार्यवाही का हिस्सा बनने की अनुमति मिल सकती है।
अनंत सिंह को अक्टूबर में चुनाव प्रचार के दौरान एक हत्या के मामले में नामजद किए जाने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में दुलारचंद यादव की हत्या हुई थी। निचली अदालत द्वारा 20 नवंबर को उनकी जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया है।
जेल से चुनाव जीतने का दूसरा मौका
यह दूसरा मौका है जब अनंत सिंह ने जेल में रहते हुए विधानसभा चुनाव जीता है। इससे पहले, उन्होंने 2020 में भी जेल में रहते हुए चुनाव जीता था, जिसके बाद वह पैरोल पर आकर विधानसभा में शपथ ले पाए थे। हालांकि, उस समय कोर्ट से सजा मिलने के कारण उनकी विधायकी रद्द हो गई थी।
चूंकि इस बार अनंत सिंह पर केवल चार्टशीट दायर की गई है और अभी तक कोर्ट से कोई सजा नहीं मिली है, इसलिए यह माना जा रहा है कि उन्हें विधानसभा की सदस्यता की शपथ लेने के लिए पैरोल पर बाहर निकाला जा सकता है और शपथ के बाद वापस बेऊर जेल भेज दिया जाएगा।
शपथ और नियम क्या कहते हैं?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 188 के तहत, किसी भी विधायक को पद ग्रहण करने से पहले राज्यपाल या उनके द्वारा नियुक्त प्रो-टेम स्पीकर या विधानसभा के स्पीकर के सामने शपथ लेना अनिवार्य है। कानूनी प्रावधानों के अनुसार, जेल में बंद निर्वाचित प्रतिनिधि आमतौर पर अदालत से अंतरिम जमानत या पैरोल प्राप्त करके ही सदन में आकर शपथ लेते हैं, जिसके बाद उन्हें वापस जेल लौटना पड़ता है। हालांकि, पैरोल न मिलने की स्थिति में, बहुत दुर्लभ मामलों में अधिकृत अधिकारी जेल जाकर भी शपथ दिला सकता है, पर ऐसी मिसालें बेहद कम मिलती हैं। ऐसे में अनंत सिंह के लिए मंगलवार को सदन में उपस्थित होकर शपथ लेना ही सबसे संभावित रास्ता है।