बिहार में इस साल मौसम के मिजाज बदले-बदले से हैं। मार्च के महीने में ही सूरज की तपिश ने लोगों को बेहाल करना शुरू कर दिया है। सामान्य से अधिक गर्मी और आने वाले महीनों में ‘लू’ (Heatwave) के प्रकोप को लेकर चेतावनी जारी की गई है।
कब कितनी तपेगी धरती?
प्राइवेट वेदर एजेंसी Accuweather और मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मार्च का हाल अभी से ही 36.8°C तक पहुंच चुका है। वहीं, अप्रैल की तपिश 12 से 26 अप्रैल के बीच 39°C के पार जाने की आशंका है। 15 से 26 मई के दौरान पारा 40°C या उससे ऊपर रहेगा, जिससे भीषण लू चलने की संभावना है।

क्यों समय से पहले आ गई गर्मी?
इस बार फरवरी में ही ठंड विदा हो गई और मार्च में “जेठ की दोपहरी” जैसा अहसास होने लगा। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं। सबसे पहले, भूमध्य सागर से उठने वाली नमी वाली हवाएं (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) खाड़ी देशों और कैस्पियन सागर से होते हुए भारत आती हैं। ये हिमालय से टकराकर बारिश और बर्फबारी कराती हैं, जिससे मैदानी इलाकों (जैसे बिहार) में ठंडक बनी रहती है। साथ ही नवंबर 2025 के बाद से कोई मजबूत वेस्टर्न डिस्टर्बेंस सक्रिय नहीं हुआ। नतीजतन, हवाओं में ठंडक खत्म हो गई और तापमान तेजी से बढ़ गया। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि पिछले कुछ सालों से मानसून का चक्र बदल गया है। बारिश के मौसम के जल्दी खत्म होने और ‘झमाझम’ बरसात की कमी के कारण धरती की नमी कम हो गई है, जिससे गर्मी का प्रभाव हर साल पिछले साल का रिकॉर्ड तोड़ रहा है।
साल दर साल बढ़ता खतरा;
– 2024 में 2023 से अधिक गर्मी थी।
– 2025 में 2024 का रिकॉर्ड टूटा।
– 2026 के अब तक के सबसे गर्म साल होने की आशंका जताई जा रही है।