पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की संस्मरणात्मक किताब “फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी” को लेकर उठा विवाद अब कानूनी पेचीदगियों में उलझ गया है। व्हाट्सएप और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर किताब की कथित पीडीएफ लीक होने के बाद दिल्ली पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। बता दें कि किसी भी विवादित या बिना लॉन्च हुई किताब की पीडीएफ को सोशल मीडिया पर फॉरवर्ड करना आपको कानूनी मुसीबत में डाल सकता है। डिजिटल फुटप्रिंट के जरिए पुलिस आसानी से स्रोत तक पहुंच सकती है।
क्या सच में किताब लीक हुई है?
पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया, जिनके पास इस किताब के विशेष अधिकार हैं, उन्होंने स्पष्ट किया है कि किताब को अभी तक आधिकारिक तौर पर लॉन्च ही नहीं किया गया है (न प्रिंट में, न डिजिटल में)। बाजार या इंटरनेट पर उपलब्ध कोई भी कॉपी पूरी तरह अवैध और फर्जी हो सकती है। बिना अनुमति के सर्कुलेट हो रही फाइलें न केवल कॉपीराइट का उल्लंघन हैं, बल्कि भ्रामक भी हो सकती हैं।
कॉपीराइट उल्लंघन: क्या है और क्यों है अपराध?
जब कोई व्यक्ति लेखक या प्रकाशक की अनुमति के बिना किसी बौद्धिक संपदा (किताब, लेख, संगीत) को कॉपी, स्कैन या शेयर करता है, तो उसे कॉपीराइट उल्लंघन माना जाता है। पीडीएफ बनाकर व्हाट्सएप ग्रुप्स में भेजना भी उतना ही बड़ा अपराध है जितना कि चोरी छिपे किताब छापना। भारत का कानून लेखक को अपनी रचना पर पूर्ण नियंत्रण का अधिकार देता है।
कानून की नजर में सजा;
| श्रेणी | सजा/जुर्माना |
| जेल की अवधि | 6 महीने से लेकर 3 साल तक |
| आर्थिक जुर्माना | ₹50,000 से लेकर ₹2 लाख तक |
| बार-बार अपराध | सजा और जुर्माने की राशि और भी बढ़ सकती है |
प्रकाशक क्या कर सकता है?
1) सीज एंड डेसिस्ट (Cease and Desist): अवैध रूप से बांटने वाले को कानूनी नोटिस भेजकर तुरंत रुकने की चेतावनी देना।
2) सिविल सूट: हुए नुकसान की भरपाई के लिए हर्जाना मांगना।
3) क्रिमिनल केस: पुलिस में प्राथमिकी दर्ज कराकर गिरफ्तारी और जांच की मांग करना (जैसा कि दिल्ली पुलिस के मामले में हुआ है)।