हाइड्रोजन पर भारी पड़ा बीड़ी बम,माथा पिट रहे होंगे राहुल गांधी !

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
राहुल गांधी का ‘हाइड्रोजन बम’ बिहार में एक मजबूत सियासी नैरेटिव बनाने की कोशिश थी, लेकिन केरल कांग्रेस के ‘बीड़ी’ बम पोस्ट और दरभंगा में गालीकांड ने विपक्ष की रणनीति को कमजोर कर दिया है। बिहार में पीएम मोदी की मां को गाली फिर बीड़ी विवाद ने राहुल की मेहनत पर पानी फेर दिया है। विधानसभा चुनाव 2025 की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है। इस बीच राजनीतिक माहौल में हलचल मची हुई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ और उनके ‘हाइड्रोजन बम’ वाले बयान ने जहां विपक्ष को एक नया नैरेटिव देने की कोशिश की, वहीं केरल कांग्रेस की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने सारी मेहनत पर पानी फेर दिया। इस पोस्ट में बिहार की तुलना ‘बीड़ी’ से की गई, जिसे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने बिहार का अपमान बताकर कांग्रेस को घेर लिया। इसके साथ ही, दरभंगा में राहुल गांधी की रैली के मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां के खिलाफ अपशब्दों के इस्तेमाल ने विपक्ष के लिए और मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।

राहुल का यह बयान बिहार में महागठबंधन (कांग्रेस, राजद और अन्य सहयोगी दलों) को एक नया सियासी मुद्दा देने की कोशिश थी। ‘वोट चोरी’ का नैरेटिव न केवल चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठाता है, बल्कि यह मतदाताओं में अविश्वास पैदा कर भाजपा के खिलाफ माहौल बनाने का प्रयास करता है। उनकी 16 दिन की 1300 किलोमीटर की यात्रा, जिसमें कई बड़े नेता जैसे तेजस्वी यादव, मल्लिकार्जुन खरगे और अखिलेश यादव शामिल हुए, का उद्देश्य था बिहार के मतदाताओं को उनके वोट के अधिकार के प्रति जागरूक करना और जाति जनगणना जैसे मुद्दों को उठाना। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने इस बयान को हल्का और गैरजिम्मेदाराना करार दिया। मांझी ने तंज कसते हुए कहा- “एटम बम से चींटी तक नहीं मरी, हाइड्रोजन बम का भी वही हाल होगा। ” प्रसाद ने इसे राहुल की गरिमा के खिलाफ बताया, जिससे साफ है कि भाजपा इस बयान को मुद्दा बनाकर विपक्ष को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रही है।

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जब राहुल गांधी का‘हाइड्रोजन बम’ चर्चा में था, केरल कांग्रेस की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया। 5 सितंबर 2025 को केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के आधिकारिक X हैंडल से एक पोस्ट की गई, जिसमें लिखा था, “बीड़ी और बिहार दोनों ‘ब’ से शुरू होते हैं। अब इसे पाप नहीं माना जा सकता। ” यह पोस्ट केंद्र सरकार के जीएसटी सुधारों पर कटाक्ष के तौर पर थी, लेकिन इसे बिहार के अपमान के रूप में देखा गया। पोस्ट को बाद में हटा लिया गया और KPCC ने माफी मांगते हुए कहा कि यह उनका आधिकारिक रुख नहीं था।

इस पोस्ट ने भाजपा और जेडीयू को कांग्रेस पर हमला करने का मौका दे दिया। बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा- “पहले उन्होंने प्रधानमंत्री की मां का अपमान किया, अब पूरे बिहार का। यह कांग्रेस का असली चरित्र है। ” जेडीयू के नीरज कुमार ने इसे बिहार की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान पर हमला बताया। भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने तेजस्वी यादव से सवाल किया कि क्या वह इस अपमान का समर्थन करते हैं। केरल कांग्रेस की इस गलती का समय बेहद नाजुक था, क्योंकि बिहार में चुनावी माहौल पहले से ही गर्म है। यह पोस्ट न केवल कांग्रेस की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है, बल्कि महागठबंधन के अन्य सहयोगियों, खासकर राजद को भी नुकसान पहुंचा सकती है। तेजस्वी यादव ने इस मामले में माफी की मांग की, लेकिन यह स्पष्ट है कि यह विवाद विपक्ष की एकता को कमजोर कर सकता है।

दरभंगा में राहुल-तेजस्वी के मंच से पीएम मोदी की मां को गाली से विपक्ष पहले से ही हलकान है। विपक्ष की मुश्किलें इससे बढ़ीं हैं। इससे 28 अगस्त 2025 को दरभंगा में राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के मंच से कुछ कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अपशब्दों का इस्तेमाल किया। यह घटना एक वायरल वीडियो के जरिए सामने आई। उसके बाद भाजपा ने इसे मुद्दा बनाकर बिहार बंद का आह्वान किया। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने कहा, “कांग्रेस अब गांधी जी की पार्टी नहीं, गाली वाली पार्टी बन गई है। ” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इसे ‘घुसपैठिया बचाओ यात्रा’ करार देते हुए राहुल गांधी से माफी की मांग की। हालांकि विपक्ष की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि इस घटना के समय राहुल गांधी और तेजस्वी यादव मंच पर मौजूद नहीं थे। लेकिन इसने विपक्ष के नैरेटिव को कमजोर कर दिया। बिहार में जहां मातृ-पितृ पूजा की संस्कृति गहरी है, वहां इस तरह की टिप्पणी ने जनता की भावनाओं को आहत किया। भाजपा ने इसे ‘महिलाओं का अपमान’ बताकर भावनात्मक मुद्दा बनाया, जिससे विपक्ष बैकफुट पर आ गया।

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में ये विवाद महागठबंधन के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ ने शुरू में सियासी माहौल को उनके पक्ष में करने की कोशिश की थी, लेकिन ‘बीड़ी बम’ और ‘गालीकांड’ ने उनके नैरेटिव को कमजोर कर दिया। बिहार की जनता भावनात्मक मुद्दों के प्रति संवेदनशील है, और भाजपा इसे भुनाने में माहिर है। राहुल गांधी का ‘हाइड्रोजन बम’ बिहार में एक मजबूत सियासी नैरेटिव बनाने की कोशिश थी, लेकिन केरल कांग्रेस की ‘बीड़ी’ पोस्ट और दरभंगा में गालीकांड ने विपक्ष की रणनीति को कमजोर कर दिया। ये घटनाएं दिखाती हैं कि सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर की गई गलतियां कितनी महंगी पड़ सकती हैं। भाजपा और जेडीयू ने इन विवादों को बिहार की अस्मिता से जोड़कर विपक्ष को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आने वाले चुनावों में महागठबंधन को अपनी रणनीति को फिर से मजबूत करना होगा। राहुल गांधी को ‘वोट चोरी’ के अपने दावों को ठोस सबूतों के साथ पेश करना होगा, ताकि वह जनता का भरोसा जीत सकें। दूसरी ओर, भाजपा और जेडीयू को अपनी कल्याणकारी योजनाओं और भावनात्मक मुद्दों के जरिए जनता को लुभाने का मौका मिला है। बिहार की सियासत में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या राहुल का ‘हाइड्रोजन बम’ वास्तव में फटेगा, या केरल का ‘बीड़ी बम’ विपक्ष के लिए और बड़ी मुसीबत बन जाएगा।

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