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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की घोषणा के साथ ही जमुई जिले की राजनीति में सरगर्मी तेज हो गई है। जिले के सभी चारों विधानसभा क्षेत्रों पर फिलहाल अपरोक्ष रूप से एनडीए का कब्जा है, लेकिन गठबंधन के भीतर और महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर गहरी उलझन बनी हुई है। खासकर, चकाई विधानसभा क्षेत्र में मुकाबला सबसे दिलचस्प होने के आसार हैं, जहां कई दलों और नेताओं की दावेदारी ने स्थिति को रोमांचक बना दिया है।
झाझा सीट पर स्थिति स्पष्ट, अन्य सीटों पर पेंच
जमुई जिले में झाझा ही एकमात्र विधानसभा क्षेत्र है जहां गठबंधन की स्थिति लगभग स्पष्ट है। यह सीट महागठबंधन में राजद (RJD) और एनडीए में जदयू (JDU) के पाले में रहना तय माना जा रहा है। झाझा से एनडीए के विधायक दामोदर रावत एक बार फिर मैदान में उतरने की तैयारी में हैं, जबकि महागठबंधन से पूर्व प्रत्याशी राजेंद्र यादव के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री जय प्रकाश नारायण यादव के परिवार से किसी सदस्य के उतरने की संभावना है।
हालांकि, सिकंदरा, चकाई और जमुई सीट पर गठबंधन की गांठ फंसी हुई है।
सिकंदरा और चकाई पर लोजपा-झामुमो की दावेदारी
सिकंदरा (सुरक्षित) और चकाई सीट को लेकर एनडीए और महागठबंधन दोनों में पेंच फंसा हुआ है। एनडीए में, लोजपा (LJP) 2005 के चुनाव को आधार मानकर इन दोनों सीटों पर अपनी दावेदारी पेश कर रही है, जबकि अतीत में इन सीटों पर लोजपा उम्मीदवारों को जीत नहीं मिली है।
वहीं, महागठबंधन में चकाई सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) मजबूती से दावेदारी पेश कर रहा है। सिकंदरा जो कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है (कांग्रेस ने 2015 में भी यहां जीत दर्ज की थी), उस पर राजद की दावेदारी ने मामला उलझा दिया है।
इसके अलावा, इंडियन इंकलाब पार्टी के प्रमुख आईपी गुप्ता के खाते में जमुई मुख्यालय की सीट जाने की चर्चा है, जहां से कोई अति पिछड़ा उम्मीदवार मैदान में उतर सकता है।
प्रमुख दावेदारों की लंबी कतार
सिकंदरा (सुरक्षित): फिलहाल हम (HAM) के प्रफुल्ल मांझी का कब्जा है। कांग्रेस से पूर्व विधायक बंटी चौधरी, विनोद चौधरी और स्थानीय होने का दावा करने वाले सिंधु कुमार पासवान प्रमुखता से चर्चा में हैं। राजद से पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी और गोल्डन आंबेडकर की चर्चा है, जबकि लोजपा से सांसद अरुण भारती के अलावा रवि शंकर पासवान और सुभाष चंद्र बोस जैसे नाम आगे हैं।
जमुई: यहां से भाजपा की श्रेयसी सिंह का मैदान में उतरना लगभग तय है। राजद से पूर्व मंत्री विजय प्रकाश, पूर्व विधायक अजय प्रताप और पप्पू मंडल की पत्नी सुजाता सिंह की दावेदारी मजबूत है।
चकाई: इस सीट पर सर्वाधिक घमासान है। राजद के खाते में जाने पर सावित्री देवी का उतरना तय है। अगर झामुमो को सीट मिली तो पोलुस हेंब्रम की उम्मीदवारी पर मुहर लग सकती है। एनडीए में निर्दलीय विधायक सुमित कुमार सिंह की दावेदारी मजबूत है, लेकिन पूर्व विधान पार्षद संजय प्रसाद उनकी राह में चुनौती बने हुए हैं। लोजपा के खाते में यह सीट जाने पर एमएलसी विजय सिंह की पत्नी सहित कई अन्य दावेदार लाइन में हैं।
जन सुराज जैसे नए राजनीतिक मंच से भी कई नेता (जैसे अनिल साह, रूपेश सिंह, धर्मदेव यादव) विभिन्न सीटों पर टिकट के लिए प्रयास कर रहे हैं, जिससे इस बार जमुई जिले का चुनावी रण काफी रोमांचक होने की उम्मीद है।