बिहार चुनाव 2025: ऐतिहासिक ‘प्रचंड जीत’ से NDA ने रचा इतिहास! बीजेपी का 88.1% स्ट्राइक रेट, महागठबंधन ध्वस्त

Ritu Raj

सिटी पोस्ट लाइव
2025 बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए (NDA) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। 243 सीटों में से 202 सीटों पर कब्जा करते हुए बीजेपीजेडीयू गठबंधन ने विपक्ष को बुरी तरह पराजित किया। खास बात यह रही कि बीजेपी ने इस चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए 88.1% का स्ट्राइक रेट दर्ज किया, जो सभी दलों में सबसे अधिक था। दूसरी ओर, आरजेडी महज 25 सीटों तक सीमित रह गई, और उसके प्रदर्शन में गिरावट देखी गई।

एनडीए का दमदार प्रदर्शन

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बीजेपी और जेडीयू के बीच गठबंधन ने इस चुनाव में जबरदस्त सफलता हासिल की। बीजेपी ने 101 सीटों में से 89 सीटें जीतीं, और उसका स्ट्राइक रेट 88.1% रहा। वहीं, जेडीयू ने भी 85 सीटें जीतकर 84.2% का स्ट्राइक रेट दर्ज किया। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने 29 सीटों पर चुनाव लड़ा और 19 सीटों पर जीत हासिल की, उसका स्ट्राइक रेट 67.9% रहा। जेडीयू और बीजेपी की मजबूत रणनीति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता ने एनडीए को यह ऐतिहासिक जीत दिलाई।

जीतन राम मांझी की एचएएमएस (HAM) ने 6 में से 5 सीटें जीतीं, और उनका स्ट्राइक रेट 83% रहा। वहीं, राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) ने 6 में से 4 सीटें जीतीं, और उसका सफलता दर 67% रहा। इस प्रकार, एनडीए के सभी सहयोगियों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया, जिसका सीधा असर कुल आंकड़ों में दिखा।

महागठबंधन की बुरी हार

वहीं, विपक्षी महागठबंधन का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा। आरजेडी ने 143 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन केवल 25 सीटों पर ही जीत दर्ज की, और उसका स्ट्राइक रेट मात्र 15.5% रहा। कांग्रेस ने 61 सीटों पर चुनाव लड़ा, और केवल 6 सीटें जीत सकी, उनका स्ट्राइक रेट 9.8% रहा। वामदल—सीपीआई (एमएल), भाकपा और माकपा—के गठबंधन ने मिलकर 13 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, लेकिन इन तीनों को मिलाकर सिर्फ 3 सीटें मिलीं।

जनसुराज पार्टी, जिसने 237 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे, कोई सीट नहीं जीत सकी, जो उनके लिए बड़ा झटका था। AIMIM ने 28 सीटों पर उम्मीदवार उतारे, और 5 सीटें जीतने में सफल रही, जिसका स्ट्राइक रेट 18% रहा।

राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव

इन नतीजों से साफ है कि बिहार की जनता ने एनडीए को भारी बहुमत दिया है। एनडीए की यह जीत न केवल गठबंधन की मजबूत स्थिति को दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि विपक्ष, खासकर महागठबंधन, बिहार में एकजुटता और विश्वास का संदेश देने में विफल रहा है।

विपक्ष के लिए यह परिणाम गंभीर आत्ममंथन का समय है, और खासकर आरजेडी और कांग्रेस को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा। कुल मिलाकर, इस चुनाव ने बिहार की राजनीति में एनडीए की पकड़ को और मजबूत किया है, और अगले पांच वर्षों तक राज्य में स्थिर सरकार की उम्मीद जताई जा रही है।

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