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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तैयारियों के बीच, राज्य में महागठबंधन ने सीटों के बंटवारे को लेकर एक बड़ी सफलता हासिल की है। विपक्षी दलों के गठबंधन ने घोषणा की है कि 15 सितंबर तक सीटों के बंटवारे का औपचारिक ऐलान कर दिया जाएगा। शनिवार को पटना में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के आवास पर हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में इस पर व्यापक सहमति बनी है।
इस बैठक में राष्ट्रीय जनता दल (राजद), कांग्रेस, वामपंथी दल, विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी), राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोसपा) और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया। बैठक का मुख्य एजेंडा आगामी विधानसभा चुनावों के लिए सीटों का तालमेल बिठाना था। बैठक के बाद, बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने पत्रकारों को बताया कि चर्चा सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई और सभी घटक दलों ने सीटों के बंटवारे पर अपनी सहमति जताई है। उन्होंने कहा कि इस बार पिछले चुनावों की गलतियों से सबक लेते हुए, गठबंधन यह सुनिश्चित करेगा कि हर दल अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में ही उम्मीदवार उतारे, जिससे जीत की संभावना बढ़े।
राजेश राम ने यह भी स्पष्ट किया कि राहुल गांधी की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की सफलता से कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कांग्रेस अपने सहयोगियों की सीटों पर दावा करेगी।
बैठक के बाद कांग्रेस के बिहार प्रभारी अल्लवरु ने बातचीत को ‘सार्थक’ बताया। सीटों की संख्या से जुड़े एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ‘इंडिया’ गठबंधन में नए सहयोगी दल जुड़ रहे हैं, और उन्हें समायोजित करने के लिए सभी दलों को अपने हितों का त्याग करना होगा। हालांकि, उन्होंने कांग्रेस के 70 सीटों पर अपने दावे की पुष्टि नहीं की। उन्होंने जोर देकर कहा कि गठबंधन में सीटों का बंटवारा तार्किक और संतुलित तरीके से होगा। अल्लवरु ने कहा कि ऐसा नहीं होगा कि एक पार्टी को केवल ‘अच्छी’ सीटें मिलें और दूसरी को ‘बुरी’। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा कि सभी को उचित प्रतिनिधित्व मिले।
वर्तमान में, महागठबंधन में राजद, कांग्रेस, वीआईपी और वामपंथी दल शामिल हैं। लंबे समय से चर्चा चल रही थी कि झामुमो और रालोसपा भी गठबंधन में शामिल होंगे, और इस बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि उन्हें भी कुछ सीटें दी जाएंगी, जिससे गठबंधन की ताकत और बढ़ेगी। यह सहमति विपक्षी एकता के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, खासकर तब जब सत्ताधारी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के साथ उनका सीधा मुकाबला है।
इस घोषणा से उम्मीद की जा रही है कि महागठबंधन जल्द ही अपने उम्मीदवारों की सूची जारी कर सकेगा और चुनावी रण में पूरी ताकत के साथ उतर पाएगा।