सिटी पोस्ट लाइव
आगामी बिहार विधानसभा चुनावों से पहले, सत्ताधारी NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) ने विपक्ष, खासकर तेजस्वी यादव की राजद, को मात देने के लिए एक बहुआयामी रणनीति अपनाई है। जहाँ विपक्ष लगातार नीतीश कुमार के कार्यकाल में कथित कुशासन, भ्रष्टाचार और बढ़ती उम्र को लेकर हमलावर है, वहीं केंद्र और राज्य सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं का “डबल इंजन” गठबंधन के लिए एक मजबूत ढाल बन गया है।
टैक्स और जीएसटी में राहत: सीधा जनता से जुड़ाव
हाल ही में केंद्र सरकार ने जीएसटी दरों में कटौती कर विपक्ष के महंगाई के आरोप की धार को कुंद करने की कोशिश की है। टीवी, कार और बीमा जैसी चीजों पर जीएसटी की दरें कम होने से आम आदमी को सीधे तौर पर आर्थिक राहत मिली है। भले ही विपक्ष इसे चुनावी हथकंडा करार दे, पर कीमतों में गिरावट का सीधा असर लोगों की जेब पर पड़ेगा। यह कदम भले ही बड़ी रैलियों का आधार न बने, लेकिन यह चुपचाप एनडीए के लिए मतदाताओं का समर्थन जुटा सकता है। इसी तरह, 12 लाख रुपये तक की सालाना आय पर आयकर में छूट का फैसला भी एनडीए के पक्ष में काम कर रहा है। बिहार में 6 लाख से अधिक करदाताओं को इस फैसले से फायदा हुआ है, जो स्वाभाविक रूप से केंद्र सरकार के प्रति कृतज्ञ महसूस कर सकते हैं। यह कदम एक झटके में एनडीए के लिए 6 लाख वोटों का एक मजबूत आधार तैयार कर चुका है।
महिला सशक्तिकरण और डायरेक्ट कैश ट्रांसफर
नीतीश कुमार का महिला सशक्तिकरण पर दशकों से रहा फोकस अब एनडीए के लिए एक बड़ा चुनावी हथियार बन गया है। पंचायतों और सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए आरक्षण की शुरुआत करने के बाद, उन्होंने जीविका समूह की अवधारणा को देश भर में पहुंचाया। जीविका से जुड़ी लगभग 1.5 करोड़ महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं। हाल ही में केंद्र सरकार द्वारा जीविका समूहों को 105 करोड़ रुपये का फंड ट्रांसफर करना इस प्रयास को और मजबूती देता है। इसके अलावा, राज्य सरकार द्वारा हर परिवार की एक महिला को 10 हजार रुपये नकद देने की घोषणा भी एक गेम चेंजर साबित हो सकती है। यह आर्थिक मदद सीधे तौर पर महिलाओं के हाथ में जाएगी, जिससे उन्हें रोजगार शुरू करने में मदद मिलेगी।
मुफ्त बिजली और पेंशन में बढ़ोतरी
तेजस्वी यादव और अन्य विपक्षी दल भले ही इसे “नकल” कहें, लेकिन नीतीश सरकार की मुफ्त बिजली और बढ़ी हुई पेंशन योजनाएं मतदाताओं के बीच लोकप्रिय हो रही हैं। 125 यूनिट मुफ्त बिजली की योजना से राज्य के एक करोड़ से अधिक लोगों को लाभ मिला है। यह दिल्ली और झारखंड जैसे राज्यों के सफल ‘फ्रीबीज’ मॉडल की तर्ज पर लाया गया है, जो सत्ता पाने का एक प्रभावी तरीका साबित हुआ है। इसी तरह, सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 400 से बढ़ाकर 1100 रुपये कर दिया गया है, जिससे एक करोड़ से अधिक बुजुर्ग, विधवाएं और दिव्यांग लाभान्वित हो रहे हैं। जनता उसी सरकार पर भरोसा करती है, जो उन्हें तत्काल लाभ दे, और इन योजनाओं से यही हो रहा है।
संक्षेप में, एनडीए की यह रणनीति विपक्ष के भावनात्मक और आरोप-आधारित प्रचार पर भारी पड़ सकती है। टैक्स में छूट, महिलाओं को आर्थिक मदद और मुफ्त बिजली जैसी ठोस घोषणाएं मतदाताओं को सीधे प्रभावित कर रही हैं, जिससे नीतीश कुमार के लिए एक बार फिर से ‘बल्ले-बल्ले’ होने की संभावना बढ़ गई है।