सिटी पोस्ट लाइव
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति द्वारा आयोजित मैट्रिक (कक्षा 10वीं) की परीक्षा के पहले ही दिन आरा में अभूतपूर्व अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। भोजपुर जिले के परीक्षा केंद्रों पर उस वक्त हंगामा बरप गया, जब कड़ी सुरक्षा और सख्त नियमों के बावजूद कई परीक्षार्थी समय से केंद्र पर नहीं पहुंच सके। आरा शहर के राजकीय कन्या प्लस टू उच्च विद्यालय के बाहर का मंजर तो किसी युद्ध क्षेत्र जैसा नजर आया, जहाँ छात्राओं ने स्कूल की ऊँची दीवारों को फांदकर अंदर प्रवेश किया।
नियमों की सख्ती और अभिभावकों का ‘धावा’
परीक्षा शुरू होने से पहले बोर्ड ने स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि निर्धारित समय के बाद किसी भी परिस्थिति में गेट नहीं खोला जाएगा। जैसे ही परीक्षा का समय हुआ और मुख्य द्वार बंद किए गए, आरा के केंद्रों पर देरी से पहुंची छात्राओं को प्रवेश देने से मना कर दिया गया। देखते ही देखते बाहर खड़े अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा। आक्रोशित भीड़ ने गेट पर नारेबाजी शुरू कर दी और मुख्य द्वार को तोड़ने का प्रयास किया।
दीवार फांदने का सनसनीखेज वीडियो वायरल
हंगामे के बीच सोशल मीडिया पर कुछ ऐसी तस्वीरें और वीडियो सामने आए हैं जिन्होंने प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि प्रवेश न मिलने से हताश कई छात्राएं जान जोखिम में डालकर स्कूल की बाउंड्री वॉल फांदकर अंदर घुसने की कोशिश कर रही हैं। सुरक्षाकर्मियों की मौजूदगी के बावजूद इस तरह का जोखिम उठाना पूरे सिस्टम पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम भी पड़े फीके
भोजपुर जिले में इस साल कुल 41,410 परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं, जिनके लिए 36 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। अकेले आरा शहर में 26 केंद्र हैं। संवेदनशील इलाकों में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी, लेकिन अभिभावकों के भारी दबाव और छात्राओं के भविष्य का हवाला देकर की गई जबरदस्ती के सामने पुलिस को भी कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। हालांकि, काफी देर तक चले हंगामे के बाद प्रशासन ने स्थिति को संभाला और परीक्षा सुचारू रूप से शुरू हो सकी।
अनसुलझे सवाल
हर साल होने वाली इस फजीहत के बाद अब सवाल यह उठता है कि क्या केवल नियमों को सख्त बनाना काफी है? आखिर क्यों परीक्षार्थी समय का पालन नहीं कर पा रहे हैं और क्यों अभिभावक कानून को हाथ में लेने पर आमादा हो जाते हैं? क्या परीक्षा का अनुशासन केवल कागजों तक ही सीमित है? प्रशासन के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि शेष दिनों की परीक्षा में ऐसे शर्मनाक दृश्यों की पुनरावृत्ति न हो।