लालू आवास के सामने ‘बिहार में का बा’ पोस्टर: RJD का अपराध और ‘मटन भोज’ पर नीतीश सरकार पर तीखा हमला

Deepak Sharma

सिटी पोस्ट लाइव
राजधानी पटना में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के आवास के ठीक सामने एक ऐसा पोस्टर लगाया गया है, जिसने बिहार की राजनीति में गर्माहट ला दी है। यह पोस्टर लोक गायिका नेहा सिंह राठौर के चर्चित बोल “बिहार में का बा” से प्रेरित है और इसके जरिए राजद ने सीधे तौर पर नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार पर अपराध नियंत्रण में विफलता और “सामाजिक पहलू” पर सवाल उठाते हुए तीखा हमला बोला है।

अपराध पर सवाल: पारस अस्पताल गोलीकांड का जिक्र
पोस्टर के एक हिस्से में हाल ही में हुए पारस अस्पताल गोलीकांड की तस्वीर लगाई गई है। यह तस्वीर उस खौफनाक वारदात की याद दिलाती है, जब अपराधियों ने अस्पताल के भीतर घुसकर इलाज करा रहे कुख्यात अपराधी चंदन मिश्रा को गोलियों से भून डाला था। पोस्टर पर लिखा गया है: “बिहार में अपराधियों को राज बा, हॉस्पिटल में घुसकर गोली की बौछार बा।” यह पंक्ति सीधे तौर पर राज्य में बढ़ती आपराधिक घटनाओं और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाती है, खासकर तब जब अस्पताल जैसे सुरक्षित माने जाने वाले स्थानों पर भी अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। राजद इस पोस्टर के माध्यम से जनता के मन में अपराध को लेकर व्याप्त भय को उजागर करने का प्रयास कर रहा है।

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‘मटन भोज’ पर तंज: सावन माह में सत्ता पक्ष पर निशाना
पोस्टर के दूसरे हिस्से में एक और विवादास्पद मुद्दा उठाया गया है। इसमें केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की एक तस्वीर है, जिसमें उन्हें कार्यकर्ताओं को कथित तौर पर मटन खिलाते हुए दिखाया गया है। इसके नीचे व्यंगात्मक रूप से लिखा गया है: “बिहार में सावन के महीना में सत्ता पक्ष के मटन भोज के बहार बा।” यह पोस्टर उस हालिया विवाद की ओर इशारा करता है, जब सावन के पवित्र महीने में कुछ सत्ताधारी नेताओं द्वारा ‘मटन भोज’ के आयोजन को लेकर सवाल उठे थे। राजद ने इसे “सामाजिक पहलू” पर हमला बताया है, जिसका निहितार्थ यह है कि सत्ता पक्ष धार्मिक भावनाओं या सामाजिक मर्यादाओं की परवाह नहीं कर रहा है। यह आरोप कहीं न कहीं नीतीश सरकार को धार्मिक या सामाजिक रूप से असंवेदनशील दिखाने का प्रयास है।

राजद की दोहरी मार: अपराध और सामाजिक मुद्दों पर हमला
कुल मिलाकर, इस पोस्टर के जरिए राष्ट्रीय जनता दल ने नीतीश सरकार पर दोहरी चुनौती पेश की है। एक तरफ अपराध और कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर हमला बोला गया है, जो सीधे तौर पर सरकार की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठाता है। दूसरी तरफ, सावन में ‘मटन भोज’ जैसे सामाजिक/धार्मिक मुद्दे को उठाकर सत्ता पक्ष को घेरने की कोशिश की गई है, खासकर ऐसे समय में जब धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े मुद्दे अक्सर राजनीतिक बहस का केंद्र बनते हैं। यह पोस्टर राजद की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है, जिसके माध्यम से वे मौजूदा सरकार की कमजोरियों को उजागर कर आगामी चुनावों से पहले जनता के बीच अपनी पैठ बनाना चाहते हैं। लालू प्रसाद के आवास के ठीक सामने ऐसे पोस्टर का लगना एक स्पष्ट संदेश है कि राजद अब आक्रामक मूड में है और सरकार पर निशाना साधने का कोई मौका नहीं छोड़ रही है।

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